मुंबई। आमिर खान प्रोडक्शंस की सर्वाधिक प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक ‘लगान’ ने आज अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। एक भव्य ऐतिहासिक खेल-आधारित नाटक के रूप में पहचानी जाने वाली यह फिल्म आज केवल एक सिनेमा नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म इतिहास की अमूल्य धरोहर बन चुकी है। अपनी प्रेरणादायक कहानी, शानदार कलाकारों के अभिनय और अविस्मरणीय संगीत के कारण ‘लगान’ भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है।
रजत जयंती के इस विशेष अवसर पर फिल्म के निर्माताओं ने दर्शकों को इस उत्सव का हिस्सा बनने का अवसर दिया है। #लगानपोस्टरचैलेंज के माध्यम से प्रशंसक फिल्म के प्रतिष्ठित पोस्टर को अपनी कल्पना और रचनात्मकता के साथ नए रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं।
इस विशेष प्रतियोगिता के तहत प्रतिभागियों को ‘लगान’ का पोस्टर अपने अंदाज़ में तैयार करना होगा। चयनित विजेताओं को फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग में कलाकारों और निर्माण दल के साथ शामिल होने का अवसर मिलेगा।
इस रोमांचक प्रतियोगिता की घोषणा करते हुए निर्माताओं ने सामाजिक माध्यमों पर लिखा:
“जिस व्यक्ति ने हमें ‘लगान’ जैसी अमर फिल्म दी… उनकी ओर से आपके लिए एक विशेष निमंत्रण।
आशुतोष गोवारीकर आपको आमंत्रित करते हैं कि आप ‘लगान’ के प्रतिष्ठित पोस्टर को अपने अंदाज़ में फिर से रचें और #लगानपोस्टरचैलेंज का हिस्सा बनें।
अपनी प्रविष्टि ईमेल के माध्यम से lagaanposterchallenge@gmail.com पर भेजें।
या फिर उसे सामाजिक माध्यमों पर साझा करें और हमें फेसबुक, इंस्टाग्राम तथा एक्स पर टैग करें।”
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साल 2001 में प्रदर्शित ‘लगान: वन्स अपॉन अ टाइम इन इंडिया’ का निर्देशन आशुतोष गोवारीकर ने किया था। फिल्म में आमिर खान मुख्य भूमिका में थे। उनके साथ ग्रेसी सिंह, रेचल शेली, पॉल ब्लैकथॉर्न, सुहासिनी मुले, कुलभूषण खरबंदा, राजेंद्र गुप्ता, रघुबीर यादव, राजेश विवेक, श्रीवल्लभ व्यास, राज जुत्शी, प्रदीप रावत, अखिलेंद्र मिश्रा, दया शंकर पांडेय, यशपाल शर्मा, अमीन हाजी, आदित्य लाखिया, जावेद खान, ए. के. हंगल सहित कई कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। फिल्म का संगीत ए. आर. रहमान ने तैयार किया था और इसके गीत ‘घनन घनन’, ‘मितवा’, ‘राधा कैसे न जले’, ‘ओ रे छोरी’ जैसे गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
कहानी वर्ष 1893 की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जब भारत पर ब्रिटिश शासन था। सूखे और अत्यधिक करों से परेशान एक गाँव के लोगों को एक घमंडी ब्रिटिश अधिकारी क्रिकेट के खेल की चुनौती देता है। यदि गाँव वाले यह मुकाबला जीत जाते हैं तो उन्हें कर नहीं देना होगा। इसके बाद शुरू होती है उन ग्रामीणों की संघर्षपूर्ण यात्रा, जिन्हें पहले उस खेल को सीखना पड़ता है और फिर जीत हासिल करने के लिए मैदान में उतरना पड़ता है।
‘लगान’ का प्रदर्शन दुनिया भर के कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में हुआ और इसे अनेक सम्मान प्राप्त हुए। यह सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में अकादमी पुरस्कार के लिए नामांकित होने वाली भारत की तीसरी फिल्म बनी थी। साथ ही, 49वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म सहित कुल आठ पुरस्कार अपने नाम किए थे।
आज, 25 वर्ष बाद भी ‘लगान’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की गौरवगाथा के रूप में याद की जाती है।

