कोरबा, 30 मई (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) योजना ने कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग अंतर्गत डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। कभी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली महिलाएं आज हर्बल उत्पादों के निर्माण और विपणन के जरिए आत्मनिर्भर बनकर महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज प्रदेश में सफल ग्रामीण उद्यमिता और महिला आत्मनिर्भरता का प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है। 12 आदिवासी महिलाओं से गठित इस समूह ने वन धन विकास केंद्र योजना के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी नई पहचान हासिल की है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और वन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप संचालित इस योजना से जुड़ने से पहले समूह की अधिकांश महिलाएं दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। सीमित रोजगार और अस्थिर आय के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नई दिशा पकड़ ली।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की संभावनाओं को देखते हुए महिलाओं को संगठित किया गया। इसके बाद आयुर्वेद विशेषज्ञों और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा उन्हें हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के बाद समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और हर्बल टूथ पाउडर जैसे उत्पादों का निर्माण शुरू किया। गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और प्रभावी विपणन के चलते इनकी मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ संस्थागत स्तर पर भी तेजी से बढ़ी।
समूह को बड़ी सफलता तब मिली जब आयुष विभाग से उन्हें हर्बल उत्पादों की आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपये का लाभ हुआ। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि बाजार में उनकी विश्वसनीयता भी बढ़ी और नए व्यावसायिक अवसरों के द्वार खुले।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में हरिबोल स्वयं सहायता समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपये का लाभ और कमीशन अर्जित किया। वहीं वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक वन धन विकास केंद्र डोंगनाला ने करीब 26.11 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री दर्ज कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
इस सफलता का सीधा लाभ समूह की महिलाओं को मिला है। वर्तमान में समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपये तक पहुंच गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हरिबोल स्वयं सहायता समूह को ट्रायफेड (TRIFED) तथा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। यह सम्मान समूह की मेहनत, गुणवत्ता और निरंतर प्रगति का प्रमाण माना जा रहा है।
डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज यह साबित कर रहा है कि यदि शासन की योजनाओं, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और बाजार उपलब्धता का सही समन्वय हो तो आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। समूह की यह सफलता अब प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर के स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

