बलौदाबाजार, 07 अप्रैल (वेदांत समाचर)। प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों की खरीदी शुरू हो गई है। शासन द्वारा जिले में 5 उपार्जन केंद्रों को अधिसूचित किया गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा सके।
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति बलौदाबाजार, अमेरा, धुर्राबांधा, कसडोल एवं सिमगा को उपार्जन केंद्र के रूप में चयनित किया गया है। इनमें से बलौदाबाजार, अमेरा और धुर्राबांधा समितियों में खरीदी कार्य प्रारंभ हो चुका है।
अब तक जिले के 899 किसानों ने कुल 1125.34 हेक्टेयर रकबे का पंजीयन चना, मसूर और सरसों की बिक्री के लिए कराया है। खरीदी के शुरुआती चरण में तीन किसानों द्वारा 10 क्विंटल सरसों और 0.50 क्विंटल मसूर का विक्रय किया जा चुका है।
पीएम-आशा योजना के तहत केंद्र सरकार ने अरहर (तुअर), उड़द और मसूर जैसी प्रमुख दलहनी फसलों की 100 प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) किसानों से सीधे उपज की खरीदी करेंगे, जिससे किसानों को उनकी फसल का समय पर और उचित मूल्य मिल सके।
योजना का उद्देश्य किसानों को दलहन एवं तिलहन उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि देश की आयात पर निर्भरता कम हो और घरेलू स्तर पर आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत भी की गई है, जिसका लक्ष्य किसानों की आय में वृद्धि और उत्पादन में बढ़ोतरी करना है।
इस योजना के तहत अरहर, उड़द और मसूर का शत-प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जबकि मूंगफली, सोयाबीन, मूंग, चना और सरसों जैसी अन्य फसलों का 25 प्रतिशत तक उपार्जन केंद्र सरकार की प्रापण एजेंसियों नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने फसल उत्पादन के बाद वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए भी पहल की है। इसके तहत देशभर में 1,000 प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी, जिनमें प्रत्येक यूनिट को 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। इससे फसल की बर्बादी कम होगी, वैल्यू एडिशन बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
इसके अलावा, नीति आयोग की सिफारिशों के आधार पर क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग, भौगोलिक विविधता और क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित किया जा सके। सरकार ने इस मिशन के लिए 2030-31 तक के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से हासिल किया जाएगा।
