रायगढ़ 29 अप्रैल 2026 (वेदांत समाचार) । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक अनोखी परंपरा सभी को हैरान कर रही है। यहां दूल्हा-दुल्हन का गृह प्रवेश अंगारों पर चलकर कराया गया। भूपदेवपुर थाना क्षेत्र के बिलासपुर गांव में 27 अप्रैल को आयोजित इस विवाह समारोह में गंधेल गोत्र की वर्षों पुरानी परंपरा निभाई गई।
जानकारी के अनुसार, जयप्रकाश राठिया का विवाह बाड़ादरहा गांव की पुष्पा राठिया से हुआ। 26 अप्रैल को बारात पहुंचने के बाद अगले दिन दुल्हन की विदाई हुई और गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गृह प्रवेश की तैयारी की गई। दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया के अनुसार, नई दुल्हन के आगमन तक पूरे परिवार ने उपवास रखा। गृह प्रवेश से पहले किसी ने अन्न तो दूर, पानी तक ग्रहण नहीं किया।
अंगारों पर फेरे की परंपरा
गृह प्रवेश से पहले मंडप की पूजा की गई और उसे चारों ओर से ढंक दिया गया। गांव के बैगा (परंपरागत पुजारी) पर देवी-देवताओं के आगमन की मान्यता के बीच चूल्हे से निकाले गए जलते अंगार मंडप में बिछाए गए। पहले बैगा स्वयं अंगारों पर नाचे, इसके बाद दूल्हा-दुल्हन ने हाथ थामकर इन्हीं दहकते अंगारों पर फेरे लिए। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान किसी को कोई चोट नहीं पहुंची।
पवित्रता और आस्था से जुड़ी मान्यता
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा अग्नि परीक्षा के रूप में देखी जाती है। मान्यता है कि यदि दुल्हन किसी प्रकार की नकारात्मकता लेकर आई हो तो अंगारों का प्रभाव दिखाई देता है। वहीं, राठिया परिवार का मानना है कि यह रस्म दंपति को जीवन की कठिनाइयों का सामना मिलकर करने की शक्ति प्रदान करती है।
बलि और पूजा का भी महत्व
इस परंपरा के दौरान दो बकरों की बलि दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। साथ ही विवाह के पहले और बाद में गांव के प्राचीन शिव मंदिर में पूजा करना अनिवार्य माना जाता है। दूल्हा-दुल्हन ने भी मंदिर में नारियल फोड़कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया और विवाह की अंतिम रस्में पूरी कीं। ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी पूरे विश्वास और आस्था के साथ निभाई जा रही है।

