बिलासपुर रेंज में हत्या जांच का नया मॉडल: ‘स्मार्ट विवेचना’ से बढ़ेगी Conviction Rate, पुलिस अधिकारियों को मिला विशेष प्रशिक्षण – vedantsamachar.in

बिलासपुर रेंज में हत्या जांच का नया मॉडल: ‘स्मार्ट विवेचना’ से बढ़ेगी Conviction Rate, पुलिस अधिकारियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

बिलासपुर, 29 अप्रैल (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेंज में हत्या जैसे गंभीर मामलों की जांच को और अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) श्री रामगोपाल गर्ग ने ‘स्मार्ट विवेचना’ मॉडल लागू करते हुए जांच प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हत्या के मामलों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि (Conviction Rate) सुनिश्चित करना है।

इसी कड़ी में 28 अप्रैल 2026 को रेंज स्तर के पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में एएसपी से लेकर उपनिरीक्षक स्तर तक के अधिकारी शामिल हुए। आईजी ने स्पष्ट कहा कि अब पुलिस का फोकस केवल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में सजा दिलाना है।

नई व्यवस्था के तहत हर हत्या के मामले में चार्जशीट दाखिल करते समय 124 बिंदुओं की विस्तृत चेकलिस्ट का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें एफआईआर दर्ज करने से लेकर अंतिम रिपोर्ट पेश करने तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है, जिससे जांच में किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी न रह जाए।

जांच में तकनीक के उपयोग को प्राथमिकता दी गई है। अब सभी जब्ती की कार्रवाई ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के जरिए वीडियोग्राफी के साथ की जाएगी। इससे साक्ष्य मजबूत होंगे और गवाहों के मुकरने की स्थिति में भी केस पर असर नहीं पड़ेगा। घटनास्थल को ‘गोल्डन ऑवर’ में सील कर फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की मौजूदगी में ही साक्ष्य जुटाए जाएंगे।

डिजिटल और साइबर फॉरेंसिक को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया गया है। पुलिस अब आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट जैसे गूगल टेकआउट, इंटरनेट हिस्ट्री, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), IPDR और IMEI डेटा की गहराई से जांच करेगी। साथ ही, घटनास्थल के 100 किलोमीटर दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग कर फुटेज को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त किया जाएगा।

डीएनए और जैविक साक्ष्यों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। मृतक के नाखून, बाल और कपड़ों से मिले साक्ष्यों के जरिए आरोपी की मौजूदगी को वैज्ञानिक रूप से साबित करने की रणनीति अपनाई जाएगी। संवेदनशील मामलों में रात के समय भी पोस्टमार्टम की अनुमति दी गई है, जिसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी।

साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए ‘चेन ऑफ कस्टडी’ सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें साक्ष्य के संग्रहण से लेकर एफएसएल तक भेजने की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड में रखी जाएगी। इससे साक्ष्य से छेड़छाड़ की संभावना खत्म होगी।

आईजी ने निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2026 के बाद दर्ज सभी हत्या मामलों की जांच इसी नई प्रणाली के तहत की जाएगी। पुलिस अब सीसीटीएनएस एंट्री से लेकर साइबर साक्ष्य जुटाने तक पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और पेशेवर बनाएगी।

यह प्रशिक्षण वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया, जिसमें मुंगेली के एसएसपी भोजराम पटेल सहित रेंज के सभी जिलों के अधिकारी शामिल हुए। आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण सत्र हर सप्ताह अलग-अलग विषयों पर आयोजित किए जाएंगे, ताकि पुलिस अधिकारी आधुनिक जांच तकनीकों से अपडेट रह सकें।