छत्तीसगढ़ में PESA और FRA के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में टास्क फोर्स की पहली बैठक - vedantsamachar.in

छत्तीसगढ़ में PESA और FRA के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में टास्क फोर्स की पहली बैठक

रायपुर, 05 अगस्त (वेदांत समाचार)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार को महानदी मंत्रालय भवन में वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गठित टास्क फोर्स की शीर्ष समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों के विकास, ग्राम स्वशासन को मजबूत करने और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन दोनों कानूनों को बेहतर समन्वय के साथ लागू किया जाए, ताकि अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके अधिकारों का वास्तविक लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग एक तिहाई आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी हुई है। ऐसे में उनकी परंपराओं, अधिकारों और विकास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पेसा कानून के क्रियान्वयन का एक आदर्श मॉडल तैयार किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पेसा कानून ग्राम स्वशासन को मजबूत करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का माध्यम बनेगा।

उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पेसा कानून (PESA) के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर ही अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसा विकास मॉडल तैयार करना है, जिसमें जनभागीदारी और विकास कार्य साथ-साथ आगे बढ़ें।

बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2022 के तहत पेसा प्रावधानों के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत प्राप्त, स्वीकृत और लंबित व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार दावों की जानकारी ली गई।

बैठक में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) की मान्यता, संरक्षण और प्रबंधन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेसा कानून को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोगों को अपने अधिकारों और कानून के प्रावधानों की सही जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के भ्रम को दूर करने के लिए तथ्यात्मक जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई जाए।

बैठक में निर्णय लिया गया कि पेसा कानून के तहत विभिन्न विभागों द्वारा बनाए गए नियमों और प्रक्रियाओं में समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति अलग-अलग विभागों के नियमों का समन्वय और अभिसरण सुनिश्चित करेगी।

राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति में संबंधित विभागों के मंत्री और सचिव सदस्य होंगे। समिति समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।

मुख्यमंत्री ने जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को भी सक्रिय करने के निर्देश दिए। इन समितियों के माध्यम से जिला स्तर पर पेसा कानून के क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं को मजबूत करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक नीलकंठ नेताम सहित सामाजिक संस्थाओं से जुड़े विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे।

इसके अलावा मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग सोनमणि बोरा, सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन शम्मी आबदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण पाण्डेय, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रियंका ऋचा महोबिया सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।