कोरबा,03अगस्त (वेदांत समाचार)। मानिकपुर खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी लंबित मांगों के निराकरण की मांग तेज कर दी है। सोमवार को भिलाई खुर्द क्रमांक-1, 2 एवं 3, बरबसपुर, कर्रानाला, कदमहाखार, इमलीडुग्गू, रापाखर्रा, मानिकपुर, दादर खुर्द, ढेलवाडीह, कुदरी बस्ती सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़ी समस्याओं से अवगत कराया।
ग्रामीणों ने बताया कि वे पूर्व में भी अपनी मांगों का ज्ञापन सौंप चुके हैं। इसके आधार पर जयसिंह अग्रवाल ने एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) को पत्र लिखकर 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित मानिकपुर खदान विस्तार परियोजना की जनसुनवाई से पहले सभी प्रभावित परिवारों की समस्याओं के निराकरण की मांग की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक एसईसीएल प्रबंधन की ओर से कोई ठोस और संतोषजनक पहल नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जिन परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें सूची में शामिल किया जाए तथा पुनर्वास एवं रोजगार से जुड़े सभी लंबित मामलों का समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वे प्रस्तावित जनसुनवाई का समर्थन नहीं करेंगे। यदि उनकी जायज मांगों की अनदेखी जारी रही तो सभी प्रभावित ग्रामीण एकजुट होकर 21 अगस्त की जनसुनवाई का पुरजोर विरोध करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
ग्रामीणों ने बताया कि वे शीघ्र ही अपनी मांगों और आपत्तियों से संबंधित विस्तृत ज्ञापन कलेक्टर कोरबा को सौंपेंगे। इसकी प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, महाप्रबंधक (मानिकपुर क्षेत्र) तथा मुख्य महाप्रबंधक, एसईसीएल कोरबा को भी भेजी जाएगी।
इस दौरान जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि प्रभावित ग्रामीणों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं। किसी भी विकास परियोजना के नाम पर प्रभावित परिवारों के वैधानिक अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि मुआवजा, समुचित पुनर्वास और रोजगार संबंधी अधिकार सुनिश्चित किए बिना परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन से जनसुनवाई से पहले सभी लंबित मामलों का पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण करने की मांग की। अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन की लापरवाही के कारण जनसुनवाई में विरोध की स्थिति बनती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी। उन्होंने कहा कि वे पहले भी प्रभावित ग्रामीणों के साथ थे और आगे भी उनके न्यायपूर्ण अधिकारों की लड़ाई में हर स्तर पर सहयोग और समर्थन देते रहेंगे।

