भारतीय मुक्केबाजों का ऐतिहासिक प्रदर्शन, कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार जीते पांच स्वर्ण पदक - vedantsamachar.in

भारतीय मुक्केबाजों का ऐतिहासिक प्रदर्शन, कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार जीते पांच स्वर्ण पदक

ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने इतिहास रचते हुए पहली बार एक ही संस्करण में पांच स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। शनिवार को प्रीति पवार, जैस्मिन लांबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने वर्ग के फाइनल मुकाबले जीतकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाए। वहीं पैरा एथलेटिक्स में सोमन राणा ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इन शानदार प्रदर्शनों के साथ भारत के खाते में कुल 34 पदक हो गए हैं, जिनमें 11 स्वर्ण, 15 रजत और 8 कांस्य शामिल हैं। पदक तालिका में भारतीय दल चौथे स्थान पर पहुंच गया है।

महिलाओं के फाइनल मुकाबले में अरुंधति चौधरी ने पूरे मुकाबले के दौरान शानदार नियंत्रण बनाए रखा और अपनी प्रतिद्वंद्वी रीड को सर्वसम्मत निर्णय (5-0) से हराकर स्वर्ण पदक जीता। अंतिम राउंड में रेफरी ने दोनों मुक्केबाजों को मुकाबले की गति बढ़ाने के निर्देश दिए, लेकिन अरुंधति ने विपक्षी खिलाड़ी को वापसी का कोई अवसर नहीं दिया। आखिरी घंटी बजने के बाद ही उन्हें अपनी जीत का भरोसा था और निर्णय घोषित होने से पहले ही उन्होंने जश्न मनाना शुरू कर दिया। कुछ ही क्षण बाद निर्णायकों ने उन्हें विजेता घोषित कर दिया।

महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घंघास ने रोमांचक मुकाबले में स्प्लिट डिसीजन (4-1) से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक हासिल किया। मुकाबले की शुरुआत से ही उन्होंने आक्रामक खेल दिखाया, हालांकि उनकी प्रतिद्वंद्वी अल-अहमदियेह ने भी सटीक पंचों से कड़ी चुनौती पेश की। अंतिम राउंड में दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन थकान के बावजूद प्रिया ने लगातार आक्रमण जारी रखा और निर्णायकों का विश्वास जीतने में सफल रहीं।

महिलाओं के 51 किलोग्राम वर्ग में साक्षी चौधरी ने इंग्लैंड की खिलाड़ी को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। साक्षी ने बेहतरीन रणनीति अपनाते हुए बाएं हाथ से प्रतिद्वंद्वी के हमलों को रोका और दाएं हाथ से लगातार सटीक जवाबी पंच लगाए, जिससे पूरे मुकाबले में उनका दबदबा कायम रहा।

जूडो की महिलाओं की 63 किलोग्राम स्पर्धा में उन्नति शर्मा ने दक्षिण अफ्रीका की स्काई नोस्टर को महज 1 मिनट 7 सेकंड में इप्पोन के जरिए हराकर कांस्य पदक जीता। उन्होंने मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और एक निर्णायक दांव से जीत सुनिश्चित कर भारत के पदकों की संख्या में इजाफा किया।

पैरा शॉटपुट की एफ-57 श्रेणी में सोमन राणा ने 13.40 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत के शुभम जुयाल ने 13.28 मीटर के प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया। इस श्रेणी में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं, लेकिन ऊपरी शरीर की क्षमता सामान्य रहती है।

पुरुष ट्रिपल जंप में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो पदक जीते। प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया, जबकि सेल्वा प्रभु ने 16.52 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक हासिल किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जाम्बिया के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर की छलांग के साथ जीता।

स्वर्ण पदक विजेता प्रीति पवार का अंतरराष्ट्रीय करियर भी उल्लेखनीय रहा है। हरियाणा की प्रीति 2022 एशियन चैंपियनशिप और 2023 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल और 2026 एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी शानदार फॉर्म जारी रखी। प्रीति वर्तमान में एनआईएस पटियाला में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।