मैनपुर, 31 जुलाई (वेदांत समाचार)। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग, हाथी मित्र दल और पशु चिकित्सकों की संयुक्त सतर्कता से एक युवा जंगली हाथी को नया जीवन मिला है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे इस हाथी का समय पर उपचार और लगातार निगरानी के चलते अब वह पूरी तरह स्वस्थ होकर फिर से जंगल में विचरण कर रहा है। हाथी की वापसी से उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र में एक बार फिर रौनक लौट आई है।
जानकारी के अनुसार करीब 6 से 7 वर्ष का यह नर हाथी नवंबर 2025 में ओडिशा से आए सिकासार हाथी दल से बिछड़ गया था। झुंड से अलग होने के बाद हाथी लंबे समय तक अकेले जंगलों में भटकता रहा, जिसके कारण उसकी सेहत लगातार खराब होने लगी थी। कमजोर स्थिति के चलते उसके गांवों की ओर जाने और मानव-हाथी संघर्ष की आशंका भी बढ़ गई थी।
कुल्हाड़ीघाट क्षेत्र में निगरानी कर रहे हाथी मित्र दल ने हाथी के असामान्य व्यवहार को सबसे पहले महसूस किया। टीम ने देखा कि हाथी मल त्याग नहीं कर पा रहा था और भोजन निगलने में भी उसे काफी परेशानी हो रही थी। इसके बाद वन विभाग के मैदानी अमले ने तत्काल इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी और हाथी की लगातार निगरानी शुरू की गई।

हाथी की गंभीर स्थिति को देखते हुए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की विशेष टीम गठित की। पशु चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन और डॉ. राकेश वर्मा ने मौके पर पहुंचकर हाथी का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच के दौरान उल्टी के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए और तत्काल उपचार शुरू किया गया।
तौरेंगा परिक्षेत्र में करीब पांच से सात दिनों तक हाथी का गहन उपचार किया गया। वन विभाग की टीम ने चौबीसों घंटे निगरानी रखते हुए उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी। उपचार के बाद धीरे-धीरे हाथी के स्वास्थ्य में सुधार आने लगा और उसने नरम मक्का सहित आसानी से पचने वाला भोजन लेना शुरू कर दिया।
इसके बाद जनवरी-फरवरी 2026 में आयोजित ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन के दौरान कैमरा ट्रैप में यह हाथी स्वस्थ अवस्था में दिखाई दिया। इससे उसके पूरी तरह ठीक होने की पुष्टि हुई। अप्रैल 2026 में यह युवा हाथी दोबारा सिकासार हाथी दल में शामिल हो गया।
वन विभाग के अनुसार, समय रहते उपचार नहीं किया जाता तो कमजोर और अकेला हाथी भोजन की तलाश में आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ सकता था, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। वन विभाग ने इस सफलता का श्रेय हाथी मित्र दल, क्षेत्रीय वन कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों की समर्पित टीम को दिया है।
यह अभियान वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन, त्वरित चिकित्सा हस्तक्षेप और विभागीय समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में युवा हाथी की सुरक्षित वापसी वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

