सूरजपुर में पहली ही तेज बारिश में बह गई लाखों की रिटर्निंग वॉल, करोड़ों के स्टॉप डैम निर्माण पर उठे गंभीर सवाल... - vedantsamachar.in

सूरजपुर में पहली ही तेज बारिश में बह गई लाखों की रिटर्निंग वॉल, करोड़ों के स्टॉप डैम निर्माण पर उठे गंभीर सवाल…

सूरजपुर, 30 जुलाई (वेदांत समाचार)। जिले में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कंचनपुर और पंचवटी के बीच झिंक नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए स्टॉप डैम के किनारे निर्मित रिटर्निंग वॉल पहली ही तेज बारिश का दबाव नहीं झेल सकी और पूरी तरह ध्वस्त हो गई। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और निर्माण कार्य में अनियमितता एवं लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, झिंक नदी पर करीब 2.5 से 3 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉप डैम का निर्माण कराया गया था। डैम की सुरक्षा और मजबूती के लिए किनारे पर लगभग 25 से 30 लाख रुपये की लागत से रिटर्निंग वॉल बनाई गई थी। लेकिन निर्माण पूरा होने के महज तीन महीने के भीतर ही तेज बारिश के दौरान यह दीवार बह गई, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया और गुणवत्ता से समझौता किया गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य सही तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया होता तो पहली ही बारिश में रिटर्निंग वॉल नहीं ढहती। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने निर्माण एजेंसी और सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे निर्माण कार्य का तकनीकी परीक्षण कराया जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण आवश्यक है। यदि समय रहते निर्माण की गुणवत्ता की जांच की जाती तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी निर्माण

परियोजनाओं की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। यदि समय रहते इस मामले में सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठना तय माना जा रहा है।