NEET UG 2026: EWS आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, 8 लाख रुपये की आय सीमा पहली नजर में उचित; काउंसिलिंग नियमों में भी बड़े बदलाव - vedantsamachar.in

NEET UG 2026: EWS आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, 8 लाख रुपये की आय सीमा पहली नजर में उचित; काउंसिलिंग नियमों में भी बड़े बदलाव

नई दिल्ली। NEET UG 2026 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम मौखिक टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि EWS आरक्षण के लिए 8 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा पहली नजर में उचित प्रतीत होती है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आय सीमा की वैधता पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है। वहीं दूसरी ओर, NEET UG 2026 काउंसिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और छात्रों के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से कई बड़े बदलाव भी किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिनमें वर्ष 2021 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। इस अधिसूचना में अखिल भारतीय कोटा (AIQ) के तहत मेडिकल पाठ्यक्रमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि EWS आरक्षण के लिए निर्धारित 8 लाख रुपये की वार्षिक आय सीमा पहली नजर में उचित दिखाई देती है। हालांकि कोर्ट ने इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय सुरक्षित रखते हुए मामले की सुनवाई आगे जारी रखने का फैसला किया।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि यह मामला वर्ष 2021 के NEET दाखिले से जुड़ा होने के कारण अब काफी हद तक निष्प्रभावी हो चुका है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने दलील दी कि पांडे समिति ने 8 लाख रुपये की आय सीमा बनाए रखने की सिफारिश की थी, लेकिन साथ ही यह भी सुझाव दिया था कि जिन परिवारों के पास 5 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि है, उन्हें आय की परवाह किए बिना EWS श्रेणी से बाहर रखा जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लंबित रखा क्योंकि वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज सुनवाई के दौरान उपलब्ध नहीं थे। अदालत ने अधिवक्ता तन्वी दुबे को संबंधित मामलों और उनमें उठाए गए सभी मुद्दों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से भी इस मामले में सहयोग करने को कहा और याचिकाओं की प्रतियां उन्हें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।

गौरतलब है कि जनवरी 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने 2021-22 के मेडिकल प्रवेश के लिए अखिल भारतीय कोटा में OBC और EWS आरक्षण को बरकरार रखा था। उस समय अदालत ने कहा था कि 8 लाख रुपये की आय सीमा की वैधता पर अंतिम फैसला बाद में किया जाएगा। वहीं वर्ष 2022 में 103वें संविधान संशोधन को भी सुप्रीम कोर्ट ने वैध ठहराया था, जिसके तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में EWS वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान किया गया।

NEET UG 2026 काउंसिलिंग में छात्रों को मिली बड़ी राहत

इस बीच NEET UG 2026 की काउंसिलिंग प्रक्रिया में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब सीट अपग्रेडेशन के लिए उम्मीदवारों को संबंधित मेडिकल कॉलेज में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी।

यदि किसी अभ्यर्थी को सीट आवंटित हो चुकी है और उसने अगले राउंड में सीट अपग्रेडेशन का विकल्प चुना है, तो उसकी सीट काउंसिलिंग सिस्टम में सुरक्षित रहेगी। ऐसे उम्मीदवारों को केवल प्रवेश की अंतिम औपचारिकताएं पूरी करने के समय ही कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा।

इसके अलावा अब उम्मीदवार काउंसिलिंग पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन सीट छोड़ने (Seat Surrender) की सुविधा का भी लाभ उठा सकेंगे। इससे छात्रों को अनावश्यक यात्रा और समय की बचत होगी तथा पूरी प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि NEET UG काउंसिलिंग प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित बनाया जाए, ताकि सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।

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NEET UG 2026: EWS आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, 8 लाख आय सीमा उचित; काउंसिलिंग के नए नियम लागू

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NEET UG 2026 में EWS आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने 8 लाख रुपये आय सीमा को पहली नजर में उचित बताया। वहीं NEET काउंसिलिंग में सीट अपग्रेडेशन और ऑनलाइन सीट छोड़ने समेत कई बड़े बदलाव किए गए हैं।