कोरबा,28जुलाई (वेदांत समाचार)। जिले के समाज कल्याण विभाग पर एक दिव्यांग बुजुर्ग को समय पर आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं कराने और बाद में मामले को छिपाने के लिए भ्रामक जानकारी जारी करने का आरोप लगा है। प्रशांति वृद्धाश्रम प्रबंधन ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर समाज कल्याण विभाग के उप संचालक हरीश सक्सेना के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, वृद्धाश्रम में रह रहे 74 वर्षीय दिव्यांग बुजुर्ग हीरालाल चौहान के लिए 19 फरवरी 2026 को समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखकर बड़ी आकार की व्हीलचेयर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। आवेदन में बताया गया था कि वृद्धाश्रम में उपलब्ध व्हीलचेयर आकार में छोटी हैं तथा उपयोग में लाई जा रही व्हीलचेयर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। संस्था का आरोप है कि कई बार मौखिक आग्रह करने और 27 अप्रैल 2026 को कलेक्टर को लिखित शिकायत देने के बाद भी बुजुर्ग को उपयुक्त व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं कराई गई।
इस बीच 26 मई 2026 को समाज कल्याण विभाग की ओर से जनसंपर्क विभाग के माध्यम से जारी समाचार में दावा किया गया कि 19 दिसंबर 2025 को ही हितग्राही हीरालाल चौहान को व्हीलचेयर उपलब्ध करा दी गई थी। वृद्धाश्रम प्रबंधन ने इस दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि दिसंबर 2025 में भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम, जबलपुर द्वारा वृद्धाश्रम को 10 व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई थीं, लेकिन वे सभी छोटे आकार की थीं और हीरालाल चौहान के उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं थीं। संस्था का आरोप है कि विभाग ने इसी तथ्य को छिपाकर गलत जानकारी जारी की।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 16 जुलाई 2026 को हीरालाल चौहान स्वयं ऑटो से समाज कल्याण विभाग के कार्यालय पहुंचे। वहां पहुंचते ही विभाग ने तत्काल उनके उपयोग के अनुरूप बड़ी आकार की नई व्हीलचेयर उपलब्ध करा दी। संस्था ने सवाल उठाया है कि यदि विभाग का दावा सही था और दिसंबर 2025 में ही उपयुक्त व्हीलचेयर दी जा चुकी थी, तो जुलाई 2026 में नई व्हीलचेयर देने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
प्रशांति वृद्धाश्रम की संचालक संस्था ने आरोप लगाया है कि उप संचालक ने लापरवाही बरतते हुए एक दिव्यांग बुजुर्ग को लंबे समय तक आवश्यक सुविधा से वंचित रखा और बाद में जनसंपर्क विभाग के माध्यम से गलत जानकारी जारी कर प्रशासन एवं आमजन को गुमराह करने का प्रयास किया। संस्था ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है।

