IND vs SL: कौन हैं सारांश जैन, जिन्हें श्रीलंका दौरे के लिए भारत की टेस्ट टीम में मिला मौका, एक नोट ने बदली जिंदगी - vedantsamachar.in

IND vs SL: कौन हैं सारांश जैन, जिन्हें श्रीलंका दौरे के लिए भारत की टेस्ट टीम में मिला मौका, एक नोट ने बदली जिंदगी

नई दिल्ली,28जुलाई : Saransh Jain: श्रीलंका दौरे के लिए भारत की टेस्ट टीम का ऐलान कर दिया गया है. श्रीलंका दौरे पर भारत को 2 टेस्ट की सीरीज खेलनी है, जिसके लिए 15 सदस्यीय टीम में 33 साल के एक नए खिलाड़ी की एंट्री हुई है. इस खिलाड़ी का नाम है सारांश जैन. सारांश जैन को घरेलू क्रिकेट में उनके दमदार प्रदर्शन का इनाम मिला है. आइए जानते हैं कौन है ये खिलाड़ी, जिसने अचानक से भारत की टेस्ट टीम में जगह बनाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है.

मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर हैं सारांश
इंदौर के रहने वाले सारांश जैन मध्य प्रदेश की रणजी टीम के खिलाड़ी हैं. टीम में उनकी भूमिका ऑलराउंडर की है. उनका फर्स्ट क्लास करियर अब तक 54 मैचों का रहा है, जिसमें उन्होंने 2223 रन बनाने के अलावा 188 विकेट चटकाए हैं. सारांश बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं. वहीं वो दाएं हाथ से ऑफ स्पिन कराते हैं.

सारांश के खून में है क्रिकेट
बड़ी बात ये है कि सारांश जैन के खून में क्रिकेट है. मतलब ये खेल उन्हें विरासत में मिला है. उनके पिता सुबोध जैन भी मध्य प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं. अपने पिता से प्रेरणा लेकर ही उन्होंने भी क्रिकेट में करियर बनाया. सारांश आज टीम इंडिया का हिस्सा बन चुके हैं तो इसमें उनके पिता के उस नोट का भी बड़ा योगदान है, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी.

पिता के नोट ने कैसे बदली जिंदगी?
सारांश जैन के प्रोफेशनल करियर की शुरुआत क्रिकेट में साल 2014 में हुआ. इसी साल उन्होंने रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया. रणजी डेब्यू करने के बाद वो 5 मैचों की सीरीज के लिए मध्य प्रदेश की एक क्लब टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया गए थे. सारांश ऑस्ट्रेलिया में थे और घर से ज्यादा फोन नहीं आ रहे थे. ये बात उन्हें समझ नहीं आ रही थी. जब वो लौटे तो अपने पिता सुबोध जैन को बिस्तर पर लेटा देख हैरान रह गए. कैंसर के चलते उनके पिता के चेहरे का ऑपरेशन हुआ था.

सारांश जैन अपने पिता की हालत देखकर परेशान हुए. बेटे की स्थिति पिता से भी देखी नहीं गई. ऐसे में उन्होंने बेटे के नाम एक नोट लिखा. सुबोध जैन ने लिखा- बेटा अब मैं ठीक हूं. अगर तुम अच्छा खेलोगे तो मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगा.

पिता के उस नोट को पढ़ने के बाद सारांश जैन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने अंदर से खुद को मजबूत किया और क्रिकेट में रम गए. आज जो उन्हें टीम इंडिया में एंट्री मिली है, उस कामयाबी के पीछे पिता के उस नोट का भी बड़ा रोल है.