भिलाई, 21 जुलाई (वेदांत समाचार)। ललित कला अकादमी रीजनल सेंटर की स्थापना के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई। राजधानी रायपुर में इस बाबत कमेटी की मीटिंग शीघ्र होने जा रही है। इस रीजनल सेंटर के भिलाई में स्थापना के परिप्रेक्ष्य में सिविक सेंटर कृष्ण अर्जुन रथ परिसर में बौद्धिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें सुप्रसिद्ध चित्रकार हरीसेन, बी.एल. सोनी, बृजेश तिवारी, प्रवीण कालमेघ, साहित्यकार मेनका वर्मा तथा डॉ अंकुश देवांगन ने अपने विचार प्रकट किए। वहीं कलाकारों ने राज्य शासन के प्रति अपना आभार भी प्रकट किया है।परिचर्चा में वरिष्ठ चित्रकार हरीसेन ने राज्य बनने से पहले भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति के विकास में किए गए महत्वपूर्ण योगदान को सराहा। जिसके कारण तीजन बाई जैसी महान शख्सियतों का अवतरण हुआ है।
उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में संयंत्र द्वारा कलात्मक विकासकार्य नहीं किए जाने पर चिंता जाहिर की है। बी.एल. सोनी ने भिलाई को नए रीजनल सेंटर के लिए सबसे उपयुक्त जगह बताया।अपनी विशिष्ट शैली की पेंटिंग से पहचान बनाने वाले चित्रकार बृजेश तिवारी ने भारतीय कंटेम्पररी और वैश्विक कला की वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डाला। और कहा कि खैरागढ़ विश्वविद्यालय तथा यहां से पढ़ लिखकर विश्व भर में फैले समस्त कलाकारों में हर्ष है।
साहित्यकार मेनका वर्मा ने परिचर्चा का संचालन करते हुए पौराणिक आख्यानों में वर्णित दक्षिण कोसल में भांजों के चरण पखारने की परम्परा को विशिष्ठ बताया। और छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला संस्कृति का वर्णन करते हुए रीजनल सेंटर में लोककला को भी शामिल करने पर बल दिया। प्रवीण कालमेघ ने नये सेंटर को एक आदर्श सेंटर बनाने पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं कमेटी के चेयरमैन डॉ. अंकुश देवांगन ने दशकों से रीजनल सेंटर की अलख जगाने वाले समस्त वरिष्ठ कलाकारों को साधुवाद दिया। राज्य शासन द्वारा भिलाई में सेंटर की पहल किए जाने पर प्रख्यात माडर्न आर्ट चित्रकार डी.एस. विद्यार्थी, मूर्तिकार मोहन बराल, कोंडागांव से मीना देवांगन, खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय से प्राध्यापक कपिल वर्मा, अमेरिका से कमलेश सक्सेना तथा समस्त कलाकारों ने हर्ष व्यक्त किया है।

