सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में निजी कंपनी के धरौली कोल ब्लॉक से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कोयला परिवहन के लिए बिछाई जा रही रेलवे लाइन और खनन परियोजना के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीण, आदिवासी, दलित और अन्य समुदायों के लोग खुलकर विरोध में उतर आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन जंगलों ने पीढ़ियों तक उनका पालन-पोषण किया, आज उन्हीं जंगलों को मशीनों से कुछ ही मिनटों में उजाड़ा जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार महुआ, तेंदूपत्ता, डोरी, लकड़ी और अन्य वन उपज ही उनके जीवनयापन का प्रमुख आधार रही है। उनका कहना है कि सैकड़ों वर्षों में तैयार हुए इन वृक्षों और जंगलों को तेजी से काटा जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि हजारों लोगों की आजीविका भी संकट में पड़ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
मुआजवा प्रक्रिया पूरी करने की मांग धरौली ग्राम पंचायत की सरपंच विद्यावती कुशवाहा ने आरोप लगाया है। कि रेलवे लाइन परियोजना के लिए न तो ग्राम पंचायत से एनओसी ली गई और न ही प्रभावित लोगों की जमीनों का विधिवत अधिग्रहण किया गया। उनका कहना है कि कई घरों और जमीनों पर नंबरिंग तो कर दी गई, लेकिन अब तक प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीण लगातार मांग कर रहे हैं कि पहले जमीन अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया पूरी की जाए, उसके बाद ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य कराया जाए।
ग्रामीण बोले- प्रशासन गंभीर नहीं पेड़ों की कटाई के विरोध में हाल ही में बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उनकी शिकायतों पर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। लोगों का कहना है कि कंपनी और प्रशासन की मिलीभगत के कारण उनकी आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका आरोप है कि जिला प्रशासन का दायित्व प्रभावित लोगों को न्याय और मुआवजा दिलाना है, लेकिन इसके विपरीत वह कंपनियों के दबाव में काम करता दिखाई दे रहा है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा ग्रामीणों ने एक और गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जंगलों के तेजी से खत्म होने के कारण भालू, हिरण और अन्य वन्यजीव अब गांवों की ओर आने लगे हैं। हाल ही में एक भालू फेंसिंग तार में फंस गया था, जिसका वीडियो भी सामने आया था। ग्रामीणों को आशंका है कि जंगलों के विनाश से मानव-वन्यजीव संघर्ष और बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इससे पहले भी क्षेत्र में वन्यजीवों के हमलों में लोगों की जान जा चुकी है।
धरौली क्षेत्र के ग्रामीण अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि विकास के नाम पर जंगल, जमीन और आजीविका को खत्म करना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

