रायपुर, 10 जुलाई 2026 (वेदांत समाचार)। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर का दौरा कर विश्वविद्यालय में उपलब्ध शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों के साथ आधुनिक अधोसंरचनाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। कृषि उत्पादन आयुक्त बनने के बाद विश्वविद्यालय का यह उनका पहला दौरा था। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न शोध परियोजनाओं, प्रयोगशालाओं, कृषि नवाचारों तथा किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।
दौरे के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त के साथ संचालक कृषि राहुल देव भी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, अनुसंधान कार्यों, शिक्षण व्यवस्था तथा कृषि विस्तार कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय किसानों की आय बढ़ाने, नई कृषि तकनीकों के विकास तथा जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
निरीक्षण के दौरान श्री परदेशी ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में लगाई गई औषधीय एवं सगंध फसलों का अवलोकन किया और इन पर चल रहे अनुसंधानों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने टिश्यू कल्चर लैब में केला, गन्ना और बांस के ऊतक संवर्धित पौधों की उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी ली। इसके अलावा कृषि संग्रहालय का भ्रमण कर कृषि के विकास से जुड़े विभिन्न मॉडल और प्रदर्शनों को देखा।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने विश्वविद्यालय परिसर में भारत सरकार द्वारा स्थापित आधुनिक मौसम वेधशाला का भी निरीक्षण किया और कृषि में मौसम आधारित तकनीकों के उपयोग की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित कृषि उत्पाद विक्रय केंद्र का भी अवलोकन किया, जहां विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उत्पाद किसानों और आम लोगों के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं।
श्री परदेशी ने डॉ. आर.एल. रिछारिया जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला और बायोटेक पार्क का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने भारत के सबसे बड़े तथा विश्व के दूसरे सबसे बड़े धान जनन द्रव्य (जर्मप्लाज्म) संग्रह को देखा। कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि विश्वविद्यालय में धान की 23,250 पारंपरिक किस्मों का संरक्षण किया गया है। इनमें कई किस्में औषधीय और पोषक गुणों से भरपूर हैं तथा इन्हीं के आधार पर नई उन्नत धान किस्मों का विकास किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य फसलों की 6,000 से अधिक किस्मों का भी संरक्षण विश्वविद्यालय में किया जा रहा है।
दौरे के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने क्रॉप बायोफोर्टिफिकेशन लैब का निरीक्षण कर संजीवनी राइस, जिंको राइस, न्यूट्री रिच राइस जीनोटाइप तथा बांस के टिश्यू कल्चर से जुड़े अनुसंधान कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित फाइटोसैनेटरी लैब का भी अवलोकन किया और वहां संचालित वैज्ञानिक गतिविधियों की सराहना की।
कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने विश्वविद्यालय द्वारा कृषि एवं किसानों की समृद्धि के लिए किए जा रहे अनुसंधान और नवाचारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य सरकार कृषि विश्वविद्यालय के विकास और शोध कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में विश्वविद्यालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बैठक में कुलसचिव, संचालक अनुसंधान, निदेशक शिक्षण, निदेशक विस्तार सेवाएं, अधिष्ठाता छात्र कल्याण सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कृषि उत्पादन आयुक्त को भविष्य की अनुसंधान योजनाओं और किसानों के लिए प्रस्तावित नई परियोजनाओं की भी जानकारी दी।

