स्टार रेटिंग में गेवरा और कुसमुंडा को बड़ा झटका, जानलेवा हादसों के कारण 'नो स्टार'; दीपका को मिली 4-स्टार रेटिंग - vedantsamachar.in

स्टार रेटिंग में गेवरा और कुसमुंडा को बड़ा झटका, जानलेवा हादसों के कारण ‘नो स्टार’; दीपका को मिली 4-स्टार रेटिंग

कोरबा,10 जुलाई (वेदांत समाचार)। देश की सर्वाधिक उत्पादन करने वाली कोयला खदानों में शामिल एसईसीएल की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा परियोजनाएं उत्पादन के मामले में कोल इंडिया की सुपर-35 श्रेणी की शीर्ष तीन खदानों में कायम हैं। इसके बावजूद वित्तीय वर्ष 2024-25 की स्टार रेटिंग में गेवरा और कुसमुंडा खदानों को बड़ा झटका लगा है। समीक्षा अवधि के दौरान हुई जानलेवा दुर्घटनाओं के कारण दोनों खदानों को मूल्यांकन के लिए अयोग्य घोषित करते हुए ‘नो स्टार रेटिंग’ प्रदान की गई है।

कोयला मंत्रालय के अधीन कोल कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन (सीसीओ) द्वारा जारी स्टार रेटिंग में एसईसीएल की दीपका ओपनकास्ट परियोजना तथा कोरबा क्षेत्र की मानिकपुर खदान को 81 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं, जिसके आधार पर दोनों को 4-स्टार रेटिंग मिली है।

एसईसीएल की भटगांव क्षेत्र स्थित जगन्नाथपुर ओपनकास्ट परियोजना कंपनी की एकमात्र ऐसी ओपनकास्ट खदान रही, जिसे 5-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई। वहीं भूमिगत खदानों में बंगवार, खैराहा, बेहराबांध और विजय वेस्ट माइंस ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 5-स्टार रेटिंग हासिल की। दूसरी ओर, कोरबा जिले में संचालित एसईसीएल की कोई भी भूमिगत अथवा ओपनकास्ट खदान इस बार 5-स्टार रेटिंग प्राप्त नहीं कर सकी।

सीसीओ द्वारा जारी स्टार रेटिंग के आधार पर कोयला कंपनियों की भूमिगत एवं ओपनकास्ट खदानों के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है। इसके लिए कंपनियां पहले पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कर स्वयं मूल्यांकन (सेल्फ असेसमेंट) के आधार पर दावा प्रस्तुत करती हैं। इसके बाद सीसीओ इन दावों का सत्यापन और समीक्षा कर अंतिम स्टार रेटिंग जारी करता है।

खदानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्टार रेटिंग व्यवस्था वर्ष 2018-19 में शुरू की गई थी। इसके तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में खदानों का मूल्यांकन किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की रेटिंग में एसईसीएल की 5 खदानों को 5-स्टार, 19 खदानों को 4-स्टार तथा 21 खदानों को 3-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है। हालांकि, देश की सबसे बड़ी उत्पादन क्षमता वाली गेवरा और कुसमुंडा खदानों का ‘नो स्टार’ श्रेणी में आना एसईसीएल के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।