बिलासपुर, 10 जुलाई (वेदांत समाचार)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) मुख्यालय, बिलासपुर में भू-जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए “Ground Water Regulation and Control” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण (CGWA), नई दिल्ली तथा केंद्रीय भू-जल बोर्ड (CGWB), उत्तर मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र, रायपुर के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भू-जल संरक्षण, वैज्ञानिक जल प्रबंधन तथा भू-जल से जुड़े नियामकीय प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देना है।
कार्यशाला का शुभारंभ एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) हरीश दुहन के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर निदेशक (तकनीकी/संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) रमेश चंद्र महापात्र सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएमडी हरीश दुहन ने कहा कि जल संरक्षण केवल पर्यावरण की सुरक्षा तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और प्रभावी जल प्रबंधन ही सतत विकास की मजबूत आधारशिला है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीनतम नियमों, तकनीकों और बेहतर कार्यप्रणालियों से अवगत कराते हैं, जिससे संस्थान में जल संसाधनों का अधिक जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है।

कार्यशाला में केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण (CGWA), नई दिल्ली के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. प्रबीर के. नाइक, वैज्ञानिक-सी उद्देश्य कुमार तथा वैज्ञानिक-सी एच. वी. सोफिया के ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भाग लिया। उन्होंने भू-जल विनियमन, केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण के दिशा-निर्देश, उद्योगों में भू-जल दोहन से संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा नियामकीय प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि उद्योगों को भू-जल उपयोग के दौरान पर्यावरणीय मानकों और सरकारी नियमों का पूर्ण पालन करना आवश्यक है।
वहीं केंद्रीय भू-जल बोर्ड (CGWB), उत्तर मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र, रायपुर के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भूषण आर. लामसोगे, वैज्ञानिक-सी सिद्धांत कुमार साहू, वैज्ञानिक-सी सायली उमेश तेंबूर्णे तथा वैज्ञानिक-सी प्रमोद साहू ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण (रीचार्ज), आधुनिक जल संरक्षण तकनीकों तथा उद्योगों में प्रभावी जल प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने जल संरक्षण की नवीन तकनीकों को अपनाने और भू-जल स्तर को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक उपायों पर विशेष जोर दिया।

निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) रमेश चंद्र महापात्र ने कहा कि जिम्मेदार और सतत खनन के लिए जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह प्रशिक्षण अधिकारियों और कर्मचारियों को भू-जल प्रबंधन से जुड़े नियामकीय प्रावधानों, तकनीकी पहलुओं और व्यावहारिक चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच विस्तृत प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भू-जल प्रबंधन, नियामकीय अनुमतियों, जल संरक्षण उपायों, उद्योगों में जल उपयोग तथा व्यावहारिक समस्याओं से जुड़े कई सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने प्रत्येक प्रश्न का उदाहरणों सहित समाधान प्रस्तुत किया, जिससे प्रतिभागियों को विषय की गहन और व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई।
दो दिवसीय इस प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों एवं इकाइयों से बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी भाग ले रहे हैं। आगामी सत्रों में भू-जल प्रबंधन, जल संरक्षण, नियामकीय अनुपालन, प्रभावी जल संसाधन प्रबंधन तथा सर्वोत्तम औद्योगिक कार्यप्रणालियों पर तकनीकी प्रस्तुतियां, संवाद और व्यावहारिक चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इससे प्रतिभागियों को अपने कार्यस्थलों पर जल संरक्षण से जुड़े उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी।
एसईसीएल की यह पहल जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत खनन के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को मजबूत करने के साथ-साथ उद्योगों में जिम्मेदार जल प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

