केवल अरहर और रागी में फायदा, बाकी दलहन-तिलहन में नुकसान
रायगढ़,30 जून(वेदांत समाचार)। सरकार ने धान का रकबा कम करने और बदले में दूसरी फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए 15 हजार रुपए प्रति एकड़ बोनस का ऐलान किया है, लेकिन खरीफ में जिन फसलों की खेती रायगढ़ में होती है, उनका औसत उत्पादन बेहद कम है। इस लिहाज से किसान की कमाई उतनी नहीं होगी, जितनी धान से होती है। सरकार की योजना पहले भी लागू हुई थी लेकिन आय के मानकों पर फेल हो गई। हर साल धान का रकबा कम करने के लिए किसानों को मनाने की कोशिश की जाती है लेकिन कोई असर नहीं होता। कांग्रेस सरकार ने पहले धान के बदले दूसरी फसल लेने की योजना लागू की थी। तब दस हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया गया था। किसानों ने इसे नकार दिया और धान पर ही भरोसा जताया। इधर धान का समर्थन मूल्य बढक़र 3100 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच चुका है।
इस बार भाजपा सरकार ने धान की जगह पर दूसरी फसल लेने पर 15 हजार रुपए देने की घोषणा की है। दूसरी वैकल्पिक फसलों का समर्थन मूल्य देखने पर पता चला कि केवल अरहर और रागी की फसल लगाने पर ही बोनस मिलाकर धान से ज्यादा कमाई होगी। अन्य दलहन और तिलहन में नुकसान है। वर्ष 26-27 के लिए अरहर की एमएसपी 8450 रुपए, उड़द की 8200 रुपए, मूंगफली की 7517 रुपए और रागी की 5205 रुपए प्रति क्विंटल तय की गई है। जबकि प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी पर 3100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान होगा। गणना करने पर प्रति एकड़ में अरहर में प्रोत्साहन राशि मिलाकर करीब 56 हजार रुपए, उड़द में 25 हजार रुपए, मूंगफली में 51 हजार रुपए और रागी में 62 हजार रुपए की आय होगी। जबकि धान 18 क्विंटल प्रति एकड़ बेचने पर 55,800 रुपए मिलेंगे।
धान के बदले दूसरी फसल लेने के लिए किसान आसानी से नहीं मान रहे हैं। इसमें फर्जी एंट्री की भी संभावना है। पिछले साल धान लगाने के बाद दूसरी फसल का पंजीयन कराने के कई मामले सामने आए थे। दरअसल धान को बेचने की एक ठोस व्यवस्था है। तीन-चार दिनों में भुगतान भी किसान के एकाउंट में आ जाता है। जबकि दूसरी फसलों के लिए बाजार तैयार नहीं किया जा सका है।

