उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी हॉर्नबिल सफारी, मालाबार पाइड हॉर्नबिल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार - vedantsamachar.in

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी हॉर्नबिल सफारी, मालाबार पाइड हॉर्नबिल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

रायपुर, 24 जून 2026 (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ के वन एवं वन्यजीव पर्यटन को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल पर प्रदेश के प्रसिद्ध उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में जल्द ही ‘हॉर्नबिल सफारी’ शुरू की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूत करना, जैव विविधता को बढ़ावा देना और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा पीवीटीजी गांव ओढ़, अमलोर और आमामोरा में हॉर्नबिल सफारी संचालित करने का निर्णय लिया गया है। वन विभाग का मानना है कि यह परियोजना संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करने का एक सफल मॉडल साबित होगी।

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है, जिनसे वन्यजीव संरक्षण को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आर्थिक विकास से जोड़ा जा सके। इसी सोच के तहत उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

पिछले चार वर्षों के दौरान रिजर्व क्षेत्र में मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वन विभाग के अनुसार यह सफलता एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण एवं रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहलों का परिणाम है। स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी ने भी पक्षी संरक्षण अभियान को मजबूती प्रदान की है।

हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके प्रयासों के चलते ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र आज हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्पॉट के रूप में विकसित हो चुका है।

प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी प्रकृति प्रेमियों, पक्षी विशेषज्ञों, वन्यजीव फोटोग्राफरों और शोधकर्ताओं के लिए नया आकर्षण बनेगी। पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल के व्यवहार और जीवन शैली को करीब से देख सकेंगे। सफारी संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था भी की गई है।

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता स्थानीय युवाओं की भागीदारी है। पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग, नेचर इंटरप्रिटेशन और पर्यटक मार्गदर्शन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये युवा नेचर गाइड और हॉर्नबिल गाइड के रूप में कार्य करेंगे, जिससे उन्हें स्थायी रोजगार और आय का स्रोत मिलेगा। इससे सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।

रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट और मिनिवेट सहित कई स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी इसे पक्षी प्रेमियों के लिए विशेष बनाती है।

यह क्षेत्र केवल पक्षी विविधता के लिए ही नहीं बल्कि इंडियन जायंट स्क्विरल और इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी जाना जाता है। समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह क्षेत्र पर्यटकों और शोधकर्ताओं को लगातार आकर्षित कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू की जा रही हॉर्नबिल सफारी संरक्षण, विकास और पर्यटन के सफल समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे एक ओर दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समुदायों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। साथ ही छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख इको-टूरिज्म और बर्डिंग डेस्टिनेशन के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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