सुपौल,23 जून। बिहार के सुपौल जिले में मंगलवार सुबह एक महिला द्वारा अपने 12 वर्षीय बेटे के साथ मोबाइल टावर पर चढ़ जाने से इलाके में हड़कंप मच गया। राघोपुर थाना क्षेत्र के सिमराही वार्ड संख्या-4 स्थित दुर्गा मंदिर के पीछे हुई इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। महिला अपने पारिवारिक विवाद में न्याय की मांग को लेकर विरोध जता रही थी और जिलाधिकारी (डीएम) तथा पुलिस अधीक्षक (एसपी) के मौके पर आने की मांग कर रही थी। जानकारी के अनुसार, टावर पर चढ़ी महिला की पहचान गुड्डी देवी के रूप में हुई है। वह मधेपुरा जिले के बिहारीगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही हैं। महिला के साथ उसका 12 वर्षीय पुत्र भी टावर पर मौजूद था। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई। देखते ही देखते पूरा इलाका लोगों से भर गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस और प्रशासन को दी। सूचना मिलते ही राघोपुर थाना पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और राहत दल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की और लोगों को टावर से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए पूरे क्षेत्र को पुलिस निगरानी में ले लिया गया। महिला का आरोप है कि लगभग दस वर्ष पहले उसकी मुलाकात मोतीपुर निवासी अमरेंद्र ठाकुर से दिल्ली-गुरुग्राम में हुई थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध बने और बाद में उन्होंने विवाह कर लिया। विवाह के बाद उनके एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसकी वर्तमान उम्र लगभग 12 वर्ष है। महिला का कहना है कि कुछ वर्षों बाद उसके पति ने दूसरी शादी कर ली और उसे अपने घर से निकाल दिया।
गुड्डी देवी का आरोप है कि अपने अधिकार और न्याय के लिए वह कई बार पुलिस थाने और प्रशासनिक अधिकारियों के पास गई, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। महिला का कहना है कि लगातार उपेक्षा और निराशा के कारण उसने यह कदम उठाने का फैसला किया। उसके अनुसार, जब सभी रास्ते बंद हो गए तो उसे अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए विरोध का यह तरीका अपनाना पड़ा। टावर पर चढ़ी महिला लगातार प्रशासन से न्याय की मांग करती रही। उसने कहा कि जब तक जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर पहुंचकर उसकी समस्याओं को सुनने और न्याय दिलाने का आश्वासन नहीं देंगे, तब तक वह नीचे नहीं उतरेगी। महिला की इस जिद ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी, क्योंकि उसके साथ एक नाबालिग बच्चा भी टावर पर मौजूद था।
मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक कर्मचारियों ने महिला को समझाने का प्रयास किया। अधिकारी लगातार उससे बातचीत करते रहे और सुरक्षित नीचे उतरने की अपील करते रहे। प्रशासन की प्राथमिकता महिला और उसके पुत्र को सुरक्षित नीचे उतारना थी ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे। घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे। कई लोग महिला की मांगों को लेकर चर्चा करते दिखाई दिए, जबकि कुछ लोग पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड करते रहे। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए और लोगों से सहयोग की अपील की। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि पारिवारिक और सामाजिक विवादों के समाधान के लिए प्रभावी संवाद और समय पर कार्रवाई कितनी आवश्यक है।

