वॉशिंगटन,16 जून । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका-ईरान समझौता पूरा हो चुका है और इस पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी डेलिगेशन की अगुआई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रम्प, जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ डिजिटल रूप से समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। हालांकि, समझौते का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि दस्तावेज शुक्रवार के बाद जारी किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच 14 पॉइंट वाला एक शुरुआती मसौदा तैयार हुआ है, जिस पर आगे तकनीकी स्तर की बातचीत होगी। वहीं कुछ रिपोर्टों के मुताबिक ईरान को आर्थिक सहायता के लिए करीब 28 लाख करोड़ रुपए का पैकेज मिल सकता है, हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- पीस डील का MoU सिर्फ डेढ़ पन्ने का दस्तावेज
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को सीएनएन के जेक टैपर से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ MoU करीब डेढ़ पन्ने का एक सामान्य दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि समझौते की कई अहम और तकनीकी जानकारियां अभी तय नहीं हुई हैं और उन पर आने वाले दौर की बातचीत में फैसला किया जाएगा।
ट्रम्प सरकार के भीतर मतभेद
पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते से ट्रम्प सरकार के भीतर मतभेद पैदा हो गया है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ को शक है कि ईरान समझौते में किए गए सभी वादे निभाएगा या नहीं।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भी मानना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर वे कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है, जिनकी अमेरिका उम्मीद कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी समझौते को लेकर चिंता जताई थी।
वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर समझौते को आगे बढ़ाने के पक्ष में थे।
ईरान लौटेंगे अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षक, यूरेनियम की निगरानी करेंगे
अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को फिर से ईरान में काम करने की अनुमति दी जाएगी। वेंस ने NBC न्यूज से बातचीत में कहा कि यह अमेरिका-ईरान समझौते की सबसे अहम शर्तों में से एक है।
वेंस ने कहा कि समझौते में साफ तौर पर लिखा गया है कि IAEA, अमेरिका और ईरान मिलकर तेहरान के पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार को खत्म करने पर काम करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षक ऐसे एक्सपर्ट्स होते हैं जो यह जांच करते हैं कि कोई देश अपने परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल सिर्फ शांतिपूर्ण मकसद के लिए कर रहा है या परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। ये निरीक्षक संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के लिए काम करते हैं।
पीस डील का बाजार, तेल और रुपए पर असर
भारत के लिए फायदा होगा, क्योंकि वह जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड सस्ता होने से आयात बिल घटेगा, चालू खाता घाटा सुधरेगा और महंगाई काबू करने में मदद मिलेगी। महंगाई कम होने से ब्याज दरों में कटौती का रास्ता खुलेगा, जिससे लोन सस्ते होंगे।
क्रूड सस्ता होते ही रुपया डॉलर के मुकाबले 60 पैसे मजबूत होकर 94.58 के स्तर पर पहुंच गया, जो बीते एक महीने का सबसे मजबूत स्तर है। शुक्रवार को भी 67 पैसे मजबूत हुआ था।
डील की घोषणा के बाद क्रूड ऑयल 5% सस्ता। भाव 83 डॉलर प्रति बैरल हुआ। अमेरिकी क्रूड 80 डॉलर हुआ। 19 जून को डील पर साइन होते हैं तो कच्चा तेल 75 से 78 डॉलर पर आ सकता है।
भारत की 55% तेल और 90% एलपीजी की सप्लाई होर्मुज से होती है। अब ये आसान होगी। डील के ऐलान के बाद होर्मुज से गुजरने वाला पहला गैस टैंकर ‘दिशा’ रहा। कतर से टैंकर भारत पहुंचेगा।

