कोरबा, 13 जून (वेदांत समाचार)। शहर के महाराणा प्रताप नगर क्षेत्र में स्थित दो जर्जर और खंडहरनुमा मकान स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गए हैं। एलआईजी-141 के सामने स्थित ये पुराने भवन वर्षों से बदहाल अवस्था में पड़े हुए हैं और अब इनमें विषैले सांपों समेत अन्य जीव-जंतुओं का बसेरा होने की आशंका जताई जा रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इन खंडहर मकानों के कारण आसपास रहने वाले लोगों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार लंबे समय से खाली पड़े इन मकानों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। भवनों की दीवारें और संरचनाएं जर्जर हो चुकी हैं, जबकि आसपास झाड़ियां और गंदगी भी जमा हो गई है। ऐसे वातावरण में सांपों और अन्य खतरनाक जीवों के पनपने की संभावना बढ़ गई है। रहवासियों का दावा है कि कई बार सांप इन खंडहरों से निकलकर आसपास के घरों और गलियों तक पहुंच चुके हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि कई वर्षों से बनी हुई है। इसके बावजूद अब तक संबंधित भवन मालिकों की पहचान कर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। नागरिकों ने सवाल उठाया है कि यदि ये संपत्तियां निजी स्वामित्व में हैं तो क्या इन पर नियमित रूप से संपत्ति कर जमा किया जा रहा है और क्या नगर निगम ने कभी इनकी स्थिति का निरीक्षण किया है।
रहवासियों ने बताया कि बारिश का मौसम शुरू होने के साथ ही सांपों के बाहर निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में खंडहर मकानों में छिपे विषैले जीव आसपास के घरों में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में किसी अप्रिय घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम कोरबा और जिला प्रशासन से मांग की है कि इन खंडहर भवनों का तत्काल सर्वे कराया जाए। साथ ही भवन मालिकों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किया जाए और आवश्यकतानुसार भवनों की मरम्मत या सुरक्षित ढंग से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाए। नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाने चाहिए।
कोरबा जिले में पहले भी विभिन्न क्षेत्रों से सांप निकलने और सर्पदंश की घटनाएं सामने आती रही हैं। यही वजह है कि कई लोग जिले को मजाकिया अंदाज में ‘नागलोक’ तक कहने लगे हैं। ऐसे में आबादी के बीच स्थित जर्जर और परित्यक्त भवनों की मौजूदगी लोगों की चिंता को और बढ़ा रही है।
क्षेत्रवासियों ने नगर निगम से अपील की है कि समस्या का जल्द समाधान कर क्षेत्र को संभावित खतरे से मुक्त कराया जाए, ताकि लोग भयमुक्त वातावरण में रह सकें और किसी भी प्रकार की अनहोनी की संभावना को समय रहते रोका जा सके।

