नई दिल्ली। आमतौर पर गार्डनिंग को लोग सिर्फ एक शौक के रूप में देखते हैं, लेकिन दिल्ली की कविता तिवारी ने इसी शौक को अपना पेशा बनाकर एक सफल बिज़नेस खड़ा कर दिया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर जुनून और क्रिएटिविटी साथ हो, तो छोटे से आइडिया से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
कविता तिवारी की इस अनोखी यात्रा की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई। उन्होंने अपने घर के गार्डन को सजाने के लिए इस्तेमाल की गई कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलों से छोटे-छोटे गमले बनाना शुरू किया। शुरुआत में यह सिर्फ एक प्रयोग था, लेकिन उनकी क्रिएटिव सोच और गमलों की मजबूती ने लोगों का ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे उनके बनाए गमले और गार्डन डेकोरेशन आइटम लोगों को इतने पसंद आने लगे कि उनके DIY प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ती चली गई। आज स्थिति यह है कि उनके बनाए हुए “बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट” गार्डन आइटम देश के कई हिस्सों में पहुंच रहे हैं और गार्डनिंग के शौकीनों के बीच खास पहचान बना चुके हैं।
कविता तिवारी का यह सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कबाड़ समझी जाने वाली चीजों में भी अनगिनत संभावनाएं छिपी होती हैं। उन्होंने अपने जुनून को एक ब्रांड में बदलकर यह साबित कर दिया कि “जुगाड़” जब “जुनून” बन जाए, तो वह सफलता की नई कहानी लिख सकता है।
आज कविता तिवारी उन लोगों के लिए मिसाल बन चुकी हैं, जो अपने शौक को सिर्फ समय बिताने का जरिया मानते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सही सोच, मेहनत और नवाचार के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने हुनर को पहचान दिलाकर आत्मनिर्भर बन सकता है।

