कमीशन का खेल: दो महीने में जर्जर हो गई नई सड़क के लिए कर दिया ठेकेदार को भुगतान, ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने की महापौर ने मांग… – vedantsamachar.in

कमीशन का खेल: दो महीने में जर्जर हो गई नई सड़क के लिए कर दिया ठेकेदार को भुगतान, ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने की महापौर ने मांग…

दुर्ग 20 मई 2026। भिलाई नगर निगम में विकास कार्यों में कमीशन खोरी इस कदर हावी हो चुका है कि गुणवत्ताहीन काम करने के बाद भी ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया. 15वें वित्त के तहत किए गए गुणवत्ताहीन सड़क निर्माण को लेकर महापौर नीरज पाल ने दुर्ग कलेक्टर को नस्तीबद्ध फाइल के साथ पत्र लिखकर ठेकेदार शशांक जैन को ब्लैक लिस्टेड करने की मांग की है. भिलाई के वार्ड 22 कुरूद में 15वें वित्त अनुदान से दो सड़कों के निर्माण के लिये 78 लाख 30 हजार का टेंडर मेसर्स शशांक जैन को दिया गया. लेकिन सड़क बने अभी दो माह भी नहीं हुए और सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुका है. कुरूद के बिना रिहायसी वाले क्षेत्र में बने सड़क की बदहाली देखकर आप भी समझ जाएंगे कि आखिर 78 लाख रुपये कहां खर्च हुए. लेकिन जिस ठेकेदार शशांक जैन की एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड करने के लिए जोन कमिश्नर एशा लहरे द्वारा पत्र लिखा गया हो. जब वहीं एजेंसी फिर से निर्माण काम शुरू कर दे. तब ऐसा होना लाजमी है.
बता दें कि निर्माण काम में देरी और गुणवत्ता को लेकर दो बार नोटिस देने के बाद भी ठेकेदार से जवाब नहीं मिलने पर 11 जून 2025 को जोन 2 आयुक्त एशा लहरे द्वारा संबंधित ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने के लिए निगम कमिश्नर को तमाम दस्तावेजों के साथ पत्र लिखा गया था.
लेकिन भिलाई निगम कमिश्नर के पास फाइल पहुंचने के बाद भी ठेकेदार ने 23 जून 2025 को पीडब्ल्यूडी ऑफिस दुर्ग से गुणवत्ता रिपोर्ट पेश कर दी, और 29 सितंबर 2025 को अपना 15 लाख 43 हजार का रनिग बिल पास करा लिया. जबकि कार्यादेश के अनुसार 6 माह यानी 28 अक्टूबर 2025 कार्य पूर्ण करने की अंतिम तिथि दी गई थी.

इस दौरान आयुक्त राजीव पाण्डेय ने स्वयं ही गुणवत्ता जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन जब ठेकेदार शशांक जैन ने अपना दूसरा रनिंग बिल 35 लाख 25 हजार का बिल लगाया. तब निम्न अर्थदंड 0.5 प्रतिशत के साथ समयावधि 4 माह बढाकर 28 फरवरी 2026 तक काम समाप्त करने का आदेश दिया गया. और फिर स्वयं निगम कमिश्नर द्वारा 27 जनवरी 2026 को दूसरे रनिंग बिल 35 लाख 25 हजार रुपए का भुगतान कर दिया गया. जबकि नियमानुसार लगभग 6 प्रतिशत का अर्थदंड वसूलने की कार्यवाई की जानी थी.
वहीं स्वयं निगम कमिश्नर स्वयं कॉंट्रेक्टर की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हैं, और फिर स्वयं निम्न अर्थदण्ड के साथ 35 लाख का बिल भी पास कर देते हैं. निगम कमिश्नर की इस कार्यशैली पर भी महापौर नीरज पाल ने सवाल खड़ा किया है.
इस मामले पर निगम कमिश्नर राजीव पांडेय ने कहा कि अधिकारियों की जानकारी के बिना निर्माण कार्य किया गया है, इसलिए अब ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्यवाई के निर्देश दिए गए हैं. लेकिन आखिरकार 50 लाख रुपए जारी करने के बाद ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्यवाई पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.