PM की अपील के समर्थन में उतरा छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन,प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी बोले– सोने की खरीद में संयम से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था – vedantsamachar.in

PM की अपील के समर्थन में उतरा छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन,प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी बोले– सोने की खरीद में संयम से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था

रायपुर,11 मई 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की अपील का छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने समर्थन किया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने कहा कि यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ सराफा व्यापार को भी दीर्घकाल में सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकता है।

कमल सोनी ने कहा कि पिछले दो वर्षों से वैश्विक युद्ध, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अस्थिरता और बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं के कारण सोने की कीमतों में लगातार अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर सराफा कारोबार पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि सामान्य आभूषण व्यापार सीमित होकर केवल बुलियन आधारित लेन-देन तक सिमट गया है, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि मूल्य अस्थिरता के कारण व्यापारियों को नुकसान और कारोबार में मंदी का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री की यह अपील भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को गति देने में सहायक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सराफा बाजार केवल सोना खरीदने-बेचने तक सीमित न रहे, बल्कि उसे सेवा आधारित मॉडल की ओर बढ़ाया जाए।

कमल सोनी के अनुसार यदि सोने के आयात में कमी आती है तो इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगा और रुपये की स्थिति मजबूत होगी। इसका लाभ छोटे उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी मिलेगा। उन्होंने इसे राष्ट्रहित में व्यापारियों की भागीदारी बताया।

उन्होंने घरेलू स्तर पर निष्क्रिय पड़े सोने को “डेड कैपिटल” बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की सोच का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह बढ़ाना है। यदि लोग बैंक, उद्योग और अन्य उत्पादक क्षेत्रों में निवेश करेंगे तो रोजगार सृजन के साथ आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

कमल सोनी ने उपभोक्ताओं को बड़े कॉर्पोरेट ज्वेलरी ब्रांड्स की आक्रामक मार्केटिंग से सावधान रहने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे मॉडल से बड़ी मात्रा में पूंजी देश से बाहर चली जाती है, जबकि स्थानीय सराफा व्यापार और पारंपरिक कारीगरों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।

इस दौरान उन्होंने लंबे समय से लंबित ‘स्वर्ण शिल्प कला बोर्ड’ के गठन की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित जिन राज्यों में अब तक यह बोर्ड गठित नहीं हुआ है, वहां जल्द इसकी स्थापना की जानी चाहिए। इससे पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों की कला और विरासत के संरक्षण के साथ उन्हें सरकारी योजनाओं, रियायती ऋण, बीमा सुविधाओं और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ मिल सकेगा।उन्होंने कहा कि “मेक इन इंडिया” की अवधारणा को मजबूत करने के लिए पारंपरिक स्वर्ण शिल्प उद्योग को संरक्षण और संस्थागत समर्थन देना समय की आवश्यकता है।