बिजली कटौती एक आम बात है, खासतौर से गर्मी के मौसम में कई शहरों में तो लंबे समय तक बिजली कटौती से लोग जूझते नजर आते हैं. ऐसे शहरों में Inverter सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है क्योंकि लाइट जाने पर इन्वर्टर ही घर को रोशन करने में मदद करता है. लेकिन क्या आप लोगों को इस बात की जानकारी है कि इन्वर्टर की बैटरी में अगर पानी का लेवल कम या फिर बहुत ही लो है तो इससे क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं?
जब इन्वर्टर बैटरी में पानी का स्तर कम हो जाता है, तो अंदर की लेड प्लेट्स हवा के संपर्क में आ जाती हैं. इससे तेजी से सल्फेशन (सल्फेशन मुख्य रूप से लेड-एसिड बैटरियों की अंदरूनी प्लेटों पर कठोर लेड सल्फेट क्रिस्टल बनने की प्रक्रिया है) होता है जिससे बैटरी ज्यादा गर्म हो जाती है और इसकी क्षमता पर असर पड़ने लगता है.
Inverter Battery में पानी का लेवल कम होने के नुकसान
अगर आपने सही समय पर इन्वर्टर में बैटरी का वाटर लेवल चेक नहीं किया और बैटरी लो लेवल पर काम करती रही तो इससे बैटरी को नुकसान पहुंच सकता है जैसे कि बैटरी का बैकअप टाइम कम हो सकता है. बैटरी की चार्जिंग स्लो हो सकती है, बैटरी में लगी प्लेट्स डैमेज हो सकती है और अगर आपने ध्यान नहीं दिया तो एक समय ऐसा भी आएगा जब बैटरी पूरी तरह से खराब भी हो सकती है. अगर ऐसा हुआ तो बैटरी को बदलने की नौबत आ सकती है.
बजाज फिनसर्व के मुताबिक, अगर बैटरी में सही मात्रा में बैटरी नहीं है तो बैटरी ओवरहीट भी कर सकती है जो बैटरी के इंटरनल कम्पोनेंट्स (पार्ट्स) की लाइफ कम कर सकते हैं जिससे बैटरी की एफिशिएंसी (क्षमता) पर बुरा असर पड़ सकता है.
कब डालें इन्वर्टर की बैटरी में पानी?
नियमित जांच बहुत ही जरूरी है, इन्वर्टर बैटरी में पानी का स्तर कम से कम महीने में एक बार जरूर चेक करें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बैटरी लेवल सही रेंज में है या नहीं. बैटरी पर लगे इंडिकेटर या विजुअल मार्कर को देखें, अगर पानी का स्तर लाल निशान से नीचे हैं तो तुरंत Distilled Water डालें या फिर इस काम के लिए आप किसी बिजली वाले भईया को भी बुला सकते हैं. पानी लाल निशान से नीचे नहीं होना चाहिए, पानी भरने के बाद फिर से हर महीने लेवल को चेक करते रहें.

