Delhi ऐइम्स: 10 मई 2026: दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी दिल्ली एम्स देश का शीर्ष सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल है। यहां देश के सभी राज्यों से लोग इलाज कराने के लिए आते हैं। यह अपने उन्नत चिकित्सा सुविधाओं, अनुसंधान और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं, जैसे कैंसर उपचार और रोबोटिक सर्जरी, के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि दिल्ली एम्स हाल के दिनों में डॉक्टरों के पलायन के कारण चर्चाओं में है। दिल्ली एम्स से डॉक्टरों का मोहभंग हो रहा है और बड़ी तादाद में डॉक्टर छोड़कर दूसरे संस्थान जा रहे हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा बार-बार जारी निर्देशों के बावजूद एम्स प्रशासन उन्हें लागू करने में लगातार उदासीन रवैया अपना रहा है। कुछ डॉक्टरों का यह कहना है कि अब एम्स में पहले जैसा माहौल नहीं रहा और प्रशासनिक कार्य प्रणाली कुछ ऐसी हो गई है कि उन्हें छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। डॉ. एके बिसोई मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों की लगातार अनदेखी से संस्थान की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों से एम्स के कुछ विभागों में मरीजों के एडमिशन, ट्रांसफर और डिस्चार्ज प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन अनियमितताओं का प्रभाव मरीजों की देखभाल, विभागीय ऑडिट और हॉस्पिटल सेंसेस तक पर पड़ रहा था। सूत्रों का दावा है कि डॉ. एके बिसोई ने इन मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई थी और इन मुद्दों को तत्कालीन निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास के संज्ञान में भी लाया था।
नर्स ने लगाया यौन उत्पीड़ का आरोप
कुछ मामले ऐसे भी हैं जिसमें डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें जबरन अलग-अलग मामलों में उलझाया जाता है। हृदय शल्य चिकित्सक डॉ. एके बिसोई से जुड़ा मामला भा सामने आया है। कथित रूप से कार्डियोलॉजी विभाग की महिला नर्स द्वारा दिए गए एक ग्रीवांस लेटर से शुरू हुआ, जिसमें उसने स्वयं यह उल्लेख किया था कि उससे सुचारु रूप से काम नहीं हो पा रहा है और इसी कारण उसने अपने ट्रांसफर का अनुरोध भी किया था। आरोप है कि इस ग्रीवांस को प्रशासनिक स्तर पर संबोधित करने के बजाय एम्स प्रशासन ने एम्स नर्स एसोसिएशन के जरिए देश के जाने-माने कार्डियक सर्जन डॉ. एके बिसोई के विरुद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच शुरू कराई और मामले को एम्स की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को भेज दिया। हालांकि, आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने 23 अक्टूबर 2025 को अपनी रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज कर दिया।
NCST की रिव्यू बैठक पर भी उठे सवाल
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि पूरे मामले को कुछ प्रभावशाली समूह अपने तरीके से संचालित करने का प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में, 10 मार्च को AIIMS दिल्ली में आयोजित NCST की एक रिव्यू बैठक को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि बैठक के मिनट्स सार्वजनिक नहीं किए गए, ना ही NCST के वेबसाइट पर अब तक अपलोड किए गए हैं और न ही बैठक में शामिल सभी पक्षों को उपलब्ध कराए गए।

