नई दिल्ली, 09 मई। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हंटावायरस संक्रमण को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र, मल और लार से फैलता है। हालांकि संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन यह गंभीर फेफड़ों की बीमारी और कभी-कभी मौत का कारण भी बन सकता है।
हंटावायरस क्या है?
हंटावायरस वायरस का एक परिवार है, जो दुनिया भर में विभिन्न कृंतक प्रजातियों में पाया जाता है। यह मुख्य रूप से अमेरिका, यूरोप और एशिया के कुछ हिस्सों में सक्रिय है। मनुष्य आमतौर पर संक्रमित कृंतकों के उत्सर्जन से निकले वायरस कणों को सांस के जरिए अंदर लेने से संक्रमित होते हैं। बंद, खराब हवादार जगहों, पुरानी इमारतों, गोदामों या जंगलों में कृंतकों का प्रकोप होने पर जोखिम सबसे ज्यादा होता है।
यह हंटावायरस के फैलने का सबसे सामान्य तरीका है। जब चूहों का मल, मूत्र या लार सूख जाता है और हवा में धूल के कणों के साथ मिल जाता है, तो सांस लेने के दौरान ये वायरस इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
शुरुआती लक्षण (1-8 सप्ताह बाद)
बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जिस वजह से अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है।
बुखार
थकान और मांसपेशियों में दर्द
सिरदर्द
ठंड लगना
मतली या उल्टी
पेट दर्द
गंभीर रूप और जटिलताएं
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, संक्रमण दुर्लभ है लेकिन तेजी से बिगड़ सकता है। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती और आईसीयू की जरूरत पड़ सकती है। समय पर पहचान और सहायक उपचार से मृत्यु दर को काफी कम किया जा सकता है।
इलाज और टीका
फिलहाल कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा या टीका उपलब्ध नहीं है।
उपचार पूरी तरह सहायक पर आधारित है। डॉक्टर ऑक्सीजन स्तर, सांस और अन्य अंगों की निगरानी करते हैं।
रोकथाम के उपाय (डब्ल्यूएचओ सलाह)
घर और कार्यस्थल को चूहों से मुक्त रखें
दरारें, छेद बंद करें
खाना खुले में न छोड़े
सफाई करते समय मास्क और दस्ताने पहनें
पुरानी जगहों या जंगलों में साफ-सफाई करते समय विशेष सावधानी बरतें
संक्रमित लगने वाले क्षेत्रों में कृंतक नियंत्रण अभियान चलाएं

