बिलासपुर में “साइबर पर संवाद” कार्यक्रम आयोजित, साइबर ठगी रोकने पुलिस, RBI और बैंकों ने बनाया साझा रणनीति – vedantsamachar.in

बिलासपुर में “साइबर पर संवाद” कार्यक्रम आयोजित, साइबर ठगी रोकने पुलिस, RBI और बैंकों ने बनाया साझा रणनीति

बिलासपुर, 08 मई (वेदांत समाचार)। बिलासपुर पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे और बैंकिंग प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से “साइबर पर संवाद” नामक विशेष अंतर-विभागीय साइबर जागरूकता एवं समन्वय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पुलिस, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), आयकर विभाग, विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों और साइबर विशेषज्ञों ने भाग लेकर साइबर अपराध के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर चर्चा की।

कार्यक्रम का उद्देश्य साइबर अपराध की बदलती कार्यप्रणाली को समझना, बैंकिंग तंत्र में हो रहे दुरुपयोग की पहचान करना तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। कार्यक्रम में साइबर रेंज पुलिस स्टेशन के नोडल अधिकारी Gagan Kumar ने विस्तृत प्रेजेंटेशन के माध्यम से देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि देशभर में अब तक लगभग 28 लाख लोग साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं और 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि गंवा चुके हैं। उन्होंने कई वास्तविक केस स्टडी प्रस्तुत करते हुए बताया कि कुछ मामलों में बैंकिंग तंत्र के भीतर से भी अपराधियों को सहयोग मिलता है। इसमें फर्जी और म्यूल अकाउंट खुलवाना, KYC नियमों की अनदेखी करना, खाते फ्रीज होने से पहले अपराधियों को सूचना देना और साइबर नेटवर्क को संचालन में मदद करना शामिल है।

Rajnesh Singh, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर ने कार्यक्रम में कहा कि वर्तमान समय में वरिष्ठ नागरिक साइबर अपराधियों के सबसे आसान लक्ष्य बनते जा रहे हैं। उन्होंने बैंक अधिकारियों से अपील की कि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक बड़ी रकम निकालने आता है, तो संवेदनशीलता के साथ यह जरूर पूछा जाए कि कहीं वह डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी या किसी साइबर ठगी का शिकार तो नहीं हो रहा।

उन्होंने यह भी बताया कि कई बार साइबर पोर्टल पर खातों पर lien या hold लगाए जाने के बावजूद खातों से राशि डेबिट होती रहती है, जिससे पीड़ितों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संदिग्ध लेनदेन की जानकारी पुलिस को देकर बैंक साइबर अपराध रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक Ram Gopal Garg ने बैंकों को करंट अकाउंट खोलने के दौरान “Enhanced Due Diligence” अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि फर्म का भौतिक सत्यापन, व्यवसायिक गतिविधियों की फोटोग्राफी, शुरुआती दिनों में ट्रांजेक्शन लिमिट और दोबारा KYC प्रक्रिया अनिवार्य की जानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी ऐसे खातों का उपयोग केवल ठगी की राशि प्राप्त करने और उसे तुरंत ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। साथ ही genuine खाताधारकों के खातों को जल्दी डी-फ्रीज करने के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में RBI के महाप्रबंधक Manish Parashar ने साइबर अपराध और बैंकों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने RBI की “Mule Hunter.AI” पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित प्रणाली है, जो संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान करने में मदद करती है।

आयकर विभाग से Chandrashekhar Mehra ने शेल कंपनियों की कार्यप्रणाली, STR (Suspicious Transaction Report), टैक्स अधिकारियों के नाम पर होने वाली साइबर ठगी और संदिग्ध कंपनियों की पहचान संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम में Anshika Jain, RBI से Pradeep Gondhule, आयकर विभाग से Ranjan सहित विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, साइबर सेल और साइबर रेंज पुलिस स्टेशन के अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम का समापन साइबर अपराध के खिलाफ संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई करने और नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।