जूस और शेक में हो रही है खतरनाक पाउडर की मिलावट – vedantsamachar.in

जूस और शेक में हो रही है खतरनाक पाउडर की मिलावट

रायपुर, 04 (वेदांत समाचार)। फल खाना और उनका जूस पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. कई लोग फलों के जूस को घर पर बनाकर पीते हैं तो वहीं कुछ लोग इसको बाजार से खरीदकर पीते हैं. अगर आप भी बाजार से अपने सामने बनवाकर जूस पी रहे हैं तो आपको अब सावधान होने की जरूरत है. क्योंकि दुकानों में जूस और शेक को गाढ़ा करने के लिए दुकानदार धड़ल्ले से एक केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं. बता दें कि शेक को गाढ़ा और जूस को आकर्षक दिखाने के लिए D पाउडर नाम के केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है.

बता दें कि इस केमिकल का नाम क्या है इस बारे में अभी कोई जानकारी नही हैं. इस केमिकल की जांच होने के बाद ही इसके बारे में पता लग पाएगा, कि अपने फायदे के लिए दुकानदार लोगों को क्या पिला रहे थे। बाजार से पी रहे हैं जूस तो हो जाएं सावधान, खतरनाक केमिकल मिलाकर बनाया जा रहा है सामान, डॉक्टर ने बताए नुकसानअगर आप भी हेल्दी खाने के चक्कर में बाहर से जूस और शेक पीते हैं तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है. क्योंकि बाजारों में मिलने वाले जूस और शेक में एक केमिकल मिलाया जा रहा है जो उसको गाढ़ा और रंग देता है। जब भी आप मार्केट में जूस पिएं तो उसको अपने सामने बनवाएं और देखें कि दुकानदार कोई ऐसी चीज ना डाल रहा हो जो अलग हो. सड़े-गले फलों से बने जूस और शेक पीने से बचें. वो कौन से फल इस्तेमाल कर रहा है इस बात का ध्यान जरूर रखें. जूस को आकर्षक बनाने के लिए अक्सर दुकानदार रंग का इस्तेमाल करते हैं. अगर आपका जूस बहुत ज्यादा चमकीला दिखे तो सावधान रहें.

जूस पीने से बेहतर है कि आप फलों का सेवन करें. अगर आपको जूस बहुत ज्यादा मीठा और रंगीन दिख रहा है जो नॉर्मल जूस या शेक से बिल्कुल अलग हो तो उसका सेवन करने से बचें. रायपुर के प्रोफेसर अनूप कुमार से जब हमने जूस में होने वाली इस मिलावट के बारे में पूछा और इसका सेवन करने से हमारे शरीर पर क्या असर पड़ता है तो उन्होंने बताया कि केमिकल्स की तेज खुशबू की वजह से यह मिलावटी जूस सूंघकर असली और नकली में फर्क करना मुश्किल होता है. इसलिए लोगों को चाहिए कि वे जूस में डाली गई चीजों को ध्यान से देखें और समझें. मिलावटी और केमिकल वाले जूस का सेवन अगर रोज किया जाए तो ये किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

अगर आपको जूस पीने के शौक है तो कोशिश करें कि आप इसको घर पर ही फ्रेश बनाकर पिएं. आप ध्यान दीजिएगा कि जो जूस आप घर पर बनाकर पी रहे हैं और जो आप बाहर पी रहे हैं उनके टेस्ट में काफी ज्यादा अंतर होता है. अगर आपके बाद मिक्सर जूसर नही है तो आप फलों को मिक्सर में डालकर ग्राइंड कर लें और फिर उसे एक बड़ी छन्नी की मदद से छानकर इसका जूस निकाल लें. ऐसा करने से आपको फ्रेश और शुद्ध जूस पीने को मिलेगा। जूस में केमिकल मिलाकर बेचने का खेल तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें दुकानदार मुनाफा कमाने के लिए ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।

हाल ही में छत्तीसगढ़ सहित दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ अनार और अन्य जूस में हानिकारक केमिकल रंगे हाथों पकड़े गए हैं।जूस में केमिकल के खेल की हकीकत:लाल रंग का केमिकल: अनार के जूस में अनार कम और पानी ज्यादा होता है, जिसे लाल रंग (फूड कलर) मिलाकर असली जैसा दिखाया जाता है।गाढ़ा करने के लिए ‘डी पाउडर’: पटना में जूस और शेक को गाढ़ा करने के लिए ‘डी पाउडर’ नामक हानिकारक केमिकल का उपयोग पाया गया।सेकरीन और एसेंस: गन्ने के रस और अन्य जूस में मिठास के लिए चीनी की जगह सेकरीन और खुशबू के लिए फ्लेवर (एसेंस) का इस्तेमाल किया जाता है।सस्ते फल और बर्फ: असली फलों की जगह सड़े-गले या सस्ते फल और अशुद्ध बर्फ का उपयोग होता है।स्वास्थ्य पर खतरनाक असर:कैंसर का खतरा: आर्टिफिशियल फूड कलर और केमिकल के लंबे समय तक सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।किडनी-लिवर खराब: ये केमिकल लिवर और किडनी को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं।

पेट से जुड़ी बीमारियां: पेट दर्द, उल्टी, गैस और अपच जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं।बच्चों पर असर: इन केमिकल्स से बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी (ADHD) और एलर्जी हो सकती है।बचाव के उपाय:घर पर जूस बनाएं: बाहर के जूस से बचने के लिए घर पर ही ताजा फल का जूस निकालना सबसे सुरक्षित है।साफ-सफाई देखें: अगर बाहर जूस पी रहे हैं, तो देखें कि क्या दुकानदार साफ पानी और फल इस्तेमाल कर रहा है।रंग पर ध्यान दें: अगर जूस का रंग बहुत ज्यादा गहरा या अस्वाभाविक लाल/पीला दिखे, तो उसे न पिएं।सामने बनवाएं: जूस हमेशा अपनी आंखों के सामने ही बनवाकर पिएं, पहले से बने जूस के जार से लेने से बचें। दोपहर की तपिश में शहर के चौक-चौराहों पर ठेले और छोटी दुकानों पर ठंडा-ठंडा का शोर है। मैंगो शेक, जूस, लस्सी और शरबत के गिलास तेजी से बनते और बिकते दिखते हैं, लेकिन जब 40 रुपये में एक गिलास मैंगो जूस और 25-30 रुपये में शेक मिल रहा है, तो सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है…क्या इसमें सच में फल है? जगह-जगह किए गए अवलोकन में सामने आया कि कई दुकानों पर शेक और जूस बनाने की प्रक्रिया चौंकाने वाली है। एक ठेले पर दुकानदार ने पहले से तैयार पीले रंग के सिरप को गिलास में डाला, उसमें पतला दूध या पानी मिलाया और कुछ सेकंड में मैंगो शेक/जूस तैयार कर दिया। कई जगह असली फल का इस्तेमाल बेहद सीमित या बिल्कुल नहीं दिखा।

स्ट्रॉबेरी और अन्य फ्लेवर के नाम पर भी तेज रंग वाले सिरप और एसेंस का ही सहारा लिया जा रहा है। बाजार के जानकार बताते हैं कि लागत घटाने के लिए कई जगह आर्टिफिशियल फ्लेवर, सिंथेटिक कलर, सैकरीन जैसे स्वीटनर और गाढ़ापन बढ़ाने वाले पाउडर का उपयोग किया जा रहा है। इससे बिना फल के भी फल जैसा स्वाद तैयार कर लिया जाता है। फूड सेफ्टी विभाग सैंपलिंग और कार्रवाई की बात करता है, लेकिन जमीनी हकीकत में ठेलों और छोटी दुकानों पर बिना लाइसेंस और बिना नियमित जांच के ये ड्रिंक्स खुलेआम बिक रहे हैं। इससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय फल मंडी में आम 60-65 रुपये और फुटकर ठेलों पर 90-100 रुपये किलो बिक रहा है। दुकानदार बताते हैं कि एक गिलास जूस के लिए करीब 150-200 ग्राम आम चाहिए, यानी सिर्फ फल की लागत ही 15-20 रुपये बैठती है।

इसमें चीनी, बर्फ, पानी, श्रम और मुनाफा जोड़ें तो एक गिलास जूस की वास्तविक कीमत 50-60 रुपये से कम नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद बाजार में यही जूस 40 रुपये में और शेक 25-30 रुपये में मिल रहे हैं। यह सीधा संकेत देता है कि या तो फल की मात्रा बेहद कम है, या फिर स्वाद और रंग के लिए फ्लेवर, सिरप और अन्य सस्ते विकल्पों का इस्तेमाल हो रहा है। सफाई पर सवाल, संक्रमण का खतरा – मामला सिर्फ मिलावट तक सीमित नहीं है। कई दुकानों पर बर्फ खुले में रखी मिली, जिसे बिना ढके इस्तेमाल किया जा रहा था। पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते हैं। गन्ने के रस और शरबत में इस्तेमाल हो रहा पानी और बर्फ संक्रमण का बड़ा कारण बन सकते हैं। बर्तनों की सफाई और हाथों की स्वच्छता का अभाव भी साफ दिखता है। अस्पतालों में दिख रहा असर – मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, गर्मी के मौसम में ऐसे मिलावटी और अस्वच्छ पेय पदार्थ सीधे पेट पर असर डालते हैं।

हाल के दिनों में उल्टी-दस्त, पेट दर्द और एलर्जी के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बच्चों और बुजुर्गों में इसका खतरा ज्यादा है और कई मामलों में फूड पॉइजनिंग तक की स्थिति बन रही है। 40 रुपये का जूस…हिसाब समझिए – आम (150-200 ग्राम): 15-20 रुपये – चीनी/अन्य: 5-10 रुपये – बर्फ, पानी, लागत : 10-15 रुपये – कुल लागत : 30-45 रुपये कम से कम किस चीज में क्या मिला रहे, क्या है जोखिम – मैंगो शेक : मिलावट – फ्लेवर, पीला कलर, पतला दूध जोखिम – एलर्जी, पोषण की कमी – बनाना शेक : एसेंस – मिलावट – स्टार्च पाउडर जोखिम – पाचन गड़बड़ी – स्ट्रॉबेरी/अन्य शेक : मिलावट – सिंथेटिक सिरप, तेज रंग जोखिम – त्वचा एलर्जी – लस्सी : मिलावट : बासी/मिलावटी दही, ज्यादा पानी जोखिम – फूड पॉइजनिंग – शरबत: मिलावट : सैकरीन, सिंथेटिक कलर जोखिम – पाचन समस्या – गन्ना जूस : मिलावट – गंदा पानी/बर्फ जोखिम – डायरिया, टाइफाइड – कोल्ड कॉफी : मिलावट – फ्लेवर पाउडर, मिलावटी दूध जोखिम – पेट दर्द -इस समय आम थोक में भी 60 रुपये किलो से नीचे नहीं है। एक गिलास जूस में 150-200 ग्राम आम लगता है। ऐसे में 30-40 रुपये में जूस बेचना तभी संभव है जब फल की मात्रा कम की जाए या कुछ और मिलाया जाए। – हरिश्चंद्र साहनी, थोक फल विक्रेता -गर्मी में मजबूरी है, ठंडा पीना ही पड़ता है। सस्ता मिलता है तो ले लेते हैं, लेकिन अब भरोसा नहीं होता कि इसमें असली फल है या नहीं। – राजेश यादव, पुरानी बस्ती -गर्मी के मौसम में शेक, जूस और शरबत की दुकानों की नियमित सैंपलिंग कराई जाती है। मिलावट या मानक के विपरीत सामग्री मिलने पर जुर्माना और लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है। उपभोक्ता भी संदिग्ध खाद्य पदार्थों की शिकायत कर सकते हैं।