राजिम। नगर में इन दिनों बच्चों की दिमागी कसरत और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। जागरूक महिलाओं आंचल सचदेव, प्रियंका जैन और वर्षा अग्रवाल के प्रयासों से आयोजित ग्रीष्मकालीन शतरंज प्रशिक्षण शिविर बच्चों और अभिभावकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस शिविर में करीब 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 6 वर्ष से लेकर 42 वर्ष तक के लोग शामिल हैं।
शिविर में प्रतिभागी शतरंज के मोहरों की चाल और रणनीतियों को समझकर अपने मानसिक कौशल को निखार रहे हैं। प्रशिक्षण की जिम्मेदारी नेशनल कोच संदीप पटले संभाल रहे हैं। कोच पटले बच्चों को शतरंज के बुनियादी नियमों के साथ-साथ इंटरनेशनल रेटिंग हासिल करने के गुर और मैच जीतने की उन्नत रणनीतियों का भी अभ्यास करा रहे हैं।
मात्र 20 दिनों के भीतर प्रशिक्षण का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कई बच्चे, जो पहले शतरंज से पूरी तरह अनजान थे, अब आत्मविश्वास के साथ अनुभवी खिलाड़ियों की तरह चालें चल रहे हैं। शिविर की एक बड़ी उपलब्धि देशना जैन के रूप में सामने आई है, जिन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर स्कूल स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और दिल्ली में आयोजित इंटर-स्कूल प्रतियोगिता के लिए चयनित हुईं। इससे अन्य बच्चों में भी उत्साह बढ़ा है और वे राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयारी कर रहे हैं।
आज के डिजिटल दौर में, जहां बच्चे मोबाइल और वीडियो गेम्स में अधिक समय बिताते हैं, यह शिविर उन्हें स्क्रीन से दूर रखने में भी सफल रहा है। अभिभावकों का कहना है कि शतरंज के अभ्यास से बच्चों की एकाग्रता, निर्णय क्षमता और सोचने की शक्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
बच्चों और अभिभावकों के उत्साह को देखते हुए आयोजक इस शिविर को मई माह में भी जारी रखने की योजना बना रहे हैं। इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों में संचालित करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को इस खेल की बारीकियां सीखने का अवसर मिल सके।
