नई दिल्ली,24अप्रैल। देश की राजनीति में शुक्रवार को उस समय हलचल मच गई जब आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की घोषणा भी की है। उनके साथ राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल और संदीप पाठक के भी भाजपा में जाने की बात सामने आई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के दो-तिहाई सदस्यों ने संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए भाजपा में विलय का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्वाति मालीवाल भी जल्द भाजपा में शामिल होंगी।
राघव चड्ढा ने अपने संबोधन में पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के 15 साल पार्टी को दिए, लेकिन अब पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और नैतिकता से भटक चुकी है। उनके अनुसार, पार्टी अब राष्ट्रीय हित की बजाय व्यक्तिगत हितों के लिए काम कर रही है। उन्होंने खुद को “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” बताते हुए इस निर्णय को आवश्यक बताया।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। इन मतभेदों की झलक उस समय भी देखने को मिली थी जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल में थे और उसी दौरान राघव चड्ढा विदेश दौरे पर थे। इसके अलावा लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें सक्रिय भूमिका से दूर रखा गया था।
हालांकि, आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं ने इन घटनाओं को सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बताया है। वरिष्ठ नेता संजय सिंह और अशोक कुमार मित्तल का कहना है कि पार्टी में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण होता रहता है और इसे मतभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फिलहाल इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है और आने वाले समय में इसके व्यापक असर देखने को मिल सकते हैं।
