कोरबा, 19 अप्रैल । प्रदेश में 1 अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत सभी वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) लगाना अनिवार्य किए जाने के बावजूद एक साल बाद भी इसका क्रियान्वयन अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सका है। ताजा स्थिति यह है कि अब तक केवल 33 प्रतिशत वाहनों में ही एचएसआरपी लग पाई है, जबकि बड़ी संख्या में वाहन मालिक अब भी पुराने नंबर प्लेट के साथ ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
राज्य शासन द्वारा एचएसआरपी लगाने का कार्य निजी कंपनी को टेंडर के माध्यम से सौंपा गया था। इसके तहत शहर के साथ-साथ आउटर इलाकों में भी फिटमेंट सेंटर खोले गए थे, जहां वाहन मालिकों को नई नंबर प्लेट लगाने की सुविधा दी गई। शुरुआत में शासन द्वारा तय समयसीमा के चलते लोगों में जागरूकता दिखी और भीषण गर्मी के बावजूद फिटमेंट सेंटरों में लंबी कतारें लगती थीं।
हालांकि समय बीतने के साथ लोगों की रुचि कम होती गई। वर्तमान में स्थिति यह है कि कई महीनों से प्रतिदिन केवल गिनती के 3-4 वाहन मालिक ही एचएसआरपी लगवाने के लिए सेंटरों तक पहुंच रहे हैं। इसके चलते शहर और आउटर के अधिकांश फिटमेंट सेंटर बंद हो चुके हैं, क्योंकि इतनी कम संख्या में ऑर्डर मिलने से संचालन खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
फिटमेंट सेंटर के स्टेट मैनेजर आशीष मिश्रा के अनुसार, एक साल से अधिक समय से यह प्रक्रिया जारी है, लेकिन अब तक केवल 33 प्रतिशत वाहनों में ही हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाई जा सकी है। वहीं करीब 5 प्रतिशत वाहन मालिक ऐसे भी हैं, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन तो कराया, लेकिन प्लेट लगवाने के लिए सेंटर तक नहीं पहुंचे।
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन विभाग और पुलिस द्वारा सामान्य नंबर प्लेट वाले वाहनों के खिलाफ सख्ती नहीं बरतने के कारण भी लोग एचएसआरपी लगाने में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। कार्रवाई के अभाव में वाहन मालिकों में लापरवाही बढ़ती जा रही है।
फिलहाल जिला मुख्यालय और तहसील स्तर पर ही सीमित संख्या में फिटमेंट सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां यह सुविधा जारी है। प्रशासन की ओर से सख्ती बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि अनिवार्य नियम का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

