कमर्शियल कोल माइनिंग को मिलेगी रफ्तार, मंजूरियों की समय-सीमा घटी; कोरबा के पांच कोल ब्लॉक भी नीलामी में - vedantsamachar.in

कमर्शियल कोल माइनिंग को मिलेगी रफ्तार, मंजूरियों की समय-सीमा घटी; कोरबा के पांच कोल ब्लॉक भी नीलामी में

कोरबा,06 अगस्त (वेदांत समाचार)। केंद्र सरकार ने कमर्शियल कोल माइनिंग परियोजनाओं को तेजी से शुरू कराने के उद्देश्य से विभिन्न वैधानिक मंजूरियों की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए उनकी समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी की है। नई व्यवस्था के तहत पूर्ण रूप से खोजे गए (फुली एक्सप्लोर्ड) कोल ब्लॉकों के लिए संचालन शुरू करने की समय-सीमा 51 महीने से घटाकर 40 महीने तथा आंशिक रूप से खोजे गए (पार्टली एक्सप्लोर्ड) ब्लॉकों के लिए 66 महीने से घटाकर 52 महीने कर दी गई है। यह नई व्यवस्था कोल ब्लॉकों की 15वें दौर की नीलामी से प्रभावी होगी।

सरकार के इस निर्णय से कोल ब्लॉकों के आवंटन के बाद निजी कंपनियों को आवश्यक पर्यावरणीय एवं वैधानिक स्वीकृतियां पहले की तुलना में कम समय में मिल सकेंगी। इससे खदानों का संचालन जल्द शुरू होने और देश में कोयला उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।

इधर, 14वें दौर की नीलामी में छत्तीसगढ़ समेत विभिन्न राज्यों के 41 कोल ब्लॉकों को शामिल किया गया है। इनमें कोरबा जिले के पांच कोल ब्लॉक भी शामिल हैं। इनमें करतला क्षेत्र के करतला साउथ, कलगामार और मदवानी तथा कोरबा क्षेत्र के कोलगा वेस्ट और तौलीपाली कोल ब्लॉक शामिल हैं। भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार इन सभी ब्लॉकों की संभावित वार्षिक उत्पादन क्षमता एक मिलियन टन से अधिक है। तकनीकी समिति के मूल्यांकन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सफल बोलीदाताओं को इन ब्लॉकों का आवंटन किया जाएगा।

वहीं, पसान क्षेत्र के सेंदुरगढ़ स्थित विजय सेंट्रल कोल माइंस के व्यावसायिक संचालन का अधिकार रूंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड को मिल चुका है। प्रारंभिक योजना के अनुसार यहां ओपनकास्ट खदान विकसित की जानी थी, लेकिन अब भूमिगत (अंडरग्राउंड) खनन की अनुमति प्रदान की गई है। इसी क्षेत्र में एसईसीएल की रानी अटारी और विजय वेस्ट भूमिगत खदानें भी संचालित हैं, जहां चिरमिरी एरिया प्रबंधन की देखरेख में खनन कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित अंडरग्राउंड माइंस के लिए चिन्हित क्षेत्र में पेड़ों की मार्किंग पूरी कर ली गई है तथा बारिश समाप्त होने के बाद पेड़ों की कटाई का कार्य शुरू किया जाएगा।

कमर्शियल माइनिंग से बढ़ी निजी कंपनियों की दिलचस्पी

वर्ष 2020 में कमर्शियल कोल माइनिंग नीति लागू होने के बाद निजी कंपनियों के साथ-साथ कोल इंडिया की सहायक कंपनियों की भी कोल ब्लॉकों में रुचि लगातार बढ़ी है। 15वें दौर की नीलामी में सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) ने भी पहली बार बोली लगाई है। सरकार द्वारा कमर्शियल माइनिंग के तहत आवंटित कोल ब्लॉकों से निकाले गए कोयले की खुले बाजार में बिक्री की अनुमति दिए जाने के बाद निवेशकों का रुझान और बढ़ा है। पहले इन ब्लॉकों से निकाले गए कोयले का उपयोग केवल स्वयं की जरूरतों तक सीमित था, लेकिन इस शर्त को हटाए जाने से व्यावसायिक खनन को नई गति मिलने की उम्मीद है।