भोपाल,31 जुलाई। मध्य प्रदेश पुलिस के तत्कालीन एआईजी रहे अनिल मिश्रा को दुष्कर्म और नाबालिग से गलत हरकत के मामले में जयपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है, जबकि पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ गलत हरकत करने के मामले में तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने से भी दंडित किया है।
मदद का झांसा देकर बनाया हवस का शिकार
विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए पीड़िता का विश्वास तोड़ा और उसे मदद का झांसा देकर अपना शिकार बनाया। अदालत ने इसे विश्वास और अधिकार के गंभीर दुरुपयोग का मामला माना।
मामले के अनुसार, वर्ष 2012 में पीड़िता के पति के खिलाफ सीहोर में एक मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले में मदद की उम्मीद से पीड़िता के पति ने अपनी पत्नी को तत्कालीन एआईजी अनिल मिश्रा से मिलने भेजा। मार्च 2012 में भोपाल में दोनों की मुलाकात हुई, जहां आरोपी ने कानूनी सहायता का भरोसा दिलाया। आरोप है कि मदद के बहाने अनिल मिश्रा ने पीड़िता को ऑफिसर्स मैस बुलाया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी ने पीड़िता को जोधपुर और मुंबई सहित अन्य शहरों में भी बुलाया।
पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ भी की गलत हरकत
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने पीड़िता से आर्थिक लेन-देन भी कराया और उसके खाते में पैसे ट्रांसफर करवाए। मामले में एक और गंभीर आरोप यह था कि अप्रैल 2014 में आरोपी ने पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ भी गलत हरकत की। इस संबंध में दर्ज प्रकरण में पॉक्सो एक्ट के तहत सुनवाई हुई और अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।

