रायपुर, 31 जुलाई (वेदांत समाचार)। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के कायाकल्प और राज्य की महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं औद्योगिक परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के समक्ष “बस्तर विजन” का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए सहयोग का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की समन्वित रणनीति के चलते बस्तर अब तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कभी नक्सल हिंसा और पिछड़ेपन के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई संपर्क, पर्यटन, खेल और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य बस्तर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र मंजूरी देने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है और राज्य स्तर की सभी आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी हो चुकी हैं। उनके अनुसार इस परियोजना के शुरू होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के राज्यों के किसानों को उर्वरक की बेहतर उपलब्धता मिलेगी, वहीं प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्रों के 461 गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए भी केंद्र से विशेष सहायता मांगी। उन्होंने बताया कि सुरक्षा और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन गांवों में अभी ऑफ-ग्रिड माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। स्थायी ग्रिड कनेक्टिविटी मिलने से शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, कृषि और स्थानीय उद्योगों को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत है। राष्ट्रीय स्तर का आयुर्वेद संस्थान बनने से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि “नियद नेल्ला नार 2.0” और “बस्तर मुन्ने” जैसी योजनाओं के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं। राशन, आयुष्मान भारत, जनधन खाते, वनाधिकार और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से बंद पड़े 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। इसके साथ ही दंतेवाड़ा मॉडल की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जबकि गीदम में मेडिकल कॉलेज के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार नए मेडिकल कॉलेज और आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना विकसित करने पर भी तेजी से कार्य कर रही है।
बैठक में बस्तर की कनेक्टिविटी पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि लगभग 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इसके अलावा जगदलपुर से हवाई सेवाओं के विस्तार, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे और इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना की प्रगति की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने बताया कि बैराज परियोजना से लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड बनाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों पर अधोसंरचना विकसित कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण भी प्राथमिकता में है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक माहौल तैयार किया है और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मंच मिला है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में औद्योगिक निवेश की जानकारी देते हुए बताया कि नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, गारमेंट, चॉकलेट निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और इंट्राऑक्यूलर लेंस निर्माण जैसे नए क्षेत्रों में निवेश शामिल है।
उन्होंने बताया कि नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय सुगमता और संस्थागत वातावरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश में पहला स्थान मिला है। वहीं “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026” के माध्यम से उद्योगों को समयबद्ध अनुमति, सेल्फ सर्टिफिकेशन और जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब तक 10.42 लाख महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं और अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित “लखपति दीदी सम्मेलन” में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 500 करोड़ रुपये के राज्य एआई मिशन के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं। रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण, आधार और वीडियो केवाईसी आधारित ऑनलाइन रजिस्ट्री जैसी व्यवस्थाओं से नागरिकों को बड़ी सुविधा मिली है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य की मजबूत होती वित्तीय स्थिति से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जीएसटी राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और खनिज राजस्व में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। साथ ही देश के पहले टिन ब्लॉक और लिथियम ब्लॉक की नीलामी कर छत्तीसगढ़ ने नई उपलब्धि हासिल की है।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में विकास की गति तेज हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि बस्तर के समग्र विकास, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े राज्य के प्रस्तावों को केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि छत्तीसगढ़ शांति, समृद्धि और नई संभावनाओं का मॉडल बन सके।

