रायपुर, 30 जुलाई (वेदांत समाचार)। विधानसभा चुनाव 2028 की तैयारियों के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब कांग्रेस के किसी भी नेता, पदाधिकारी या संभावित टिकट दावेदार को धरना-प्रदर्शन, आंदोलन, जनसंपर्क अभियान, रैली या किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन से पहले संबंधित जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) और प्रदेश कांग्रेस कमेटी को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। साथ ही स्थानीय संगठन के साथ समन्वय बनाकर ही कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था किसी नेता की गतिविधियों पर रोक लगाने या अनुमति लेने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर बेहतर तालमेल स्थापित करने और चुनाव से पहले एकजुटता बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है।
कांग्रेस संगठन के सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में कई नेताओं द्वारा स्थानीय जिला संगठन को विश्वास में लिए बिना अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर सहित कई जिलों से इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आई थीं। इन कार्यक्रमों के कारण कई जगह संगठन के भीतर असमंजस की स्थिति बनी और कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा हुआ। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि समानांतर गतिविधियों से गुटबाजी को बढ़ावा मिलता है, जिससे चुनावी तैयारियों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
नए निर्देशों के बाद सबसे अधिक चिंता संभावित टिकट दावेदारों में देखी जा रही है। उनका कहना है कि कई बार स्थानीय मुद्दों पर तत्काल विरोध-प्रदर्शन करना आवश्यक होता है। ऐसे में पहले संगठन को सूचना देने और समन्वय की प्रक्रिया पूरी करने से राजनीतिक प्रतिक्रिया देने में देरी हो सकती है। वहीं कुछ नेताओं को आशंका है कि यदि किसी ने इन दिशा-निर्देशों की अनदेखी की तो भविष्य में टिकट वितरण के दौरान इसका असर देखने को मिल सकता है।
प्रदेश कांग्रेस के भीतर लंबे समय से जिला कांग्रेस कमेटियों और विधायकों के बीच समन्वय की कमी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। विशेष रूप से उन विधानसभा क्षेत्रों में, जहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं, वहां संभावित दावेदारों और विधायकों के बीच कार्यक्रमों को लेकर खींचतान की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में कई बार अलग-अलग गुटों द्वारा अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाने से संगठनात्मक एकजुटता प्रभावित हुई है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन में अनुशासन और समन्वय बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह नई व्यवस्था लागू की गई है, ताकि सभी कार्यक्रम स्थानीय संगठन की जानकारी और सहभागिता के साथ आयोजित हों तथा कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता बनी रहे।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदेश कांग्रेस के नए दिशा-निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव दिखाई देता है। यदि सभी नेता और संभावित दावेदार इन नियमों का पालन करते हैं, तो चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और गुटबाजी पर नियंत्रण पाने में पार्टी को मदद मिल सकती है। वहीं, निर्देशों की अनदेखी करने वाले नेताओं के लिए भविष्य में टिकट वितरण के दौरान यह मुद्दा अहम साबित हो सकता है।

