बायोमेट्रिक वोटिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस

नई दिल्ली, 13 अप्रैल । मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कदम उठाया है। अदालत ने मतदान केंद्रों पर फिंगर और आईरिस आधारित बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल आगामी विधानसभा चुनावों में इस व्यवस्था को लागू करना संभव नहीं है। हालांकि, अदालत ने इसे गंभीर और विचारणीय मुद्दा बताते हुए कहा कि भविष्य के चुनावों—चाहे लोकसभा हों या विधानसभा—से पहले इस तकनीक को लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।

अदालत ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और कई राज्यों को नोटिस जारी कर इस विषय पर विस्तृत जवाब मांगा है। पीठ ने कहा कि यह जांचना जरूरी है कि क्या बायोमेट्रिक प्रणाली से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है।

यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि रिश्वत, फर्जी पहचान, डुप्लीकेट और घोस्ट वोटिंग जैसी समस्याएं अब भी चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर रही हैं। बायोमेट्रिक तकनीक अपनाने से इन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

अब मामले में अगली सुनवाई केंद्र, चुनाव आयोग और राज्यों के जवाब मिलने के बाद होगी, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।