RAIPUR : देहदान और नेत्रदान कर परिवार ने पूरी की मुखिया की इच्छा... - vedantsamachar.in

RAIPUR : देहदान और नेत्रदान कर परिवार ने पूरी की मुखिया की इच्छा…

रायपुर,25 जुलाई (वेदांत समाचार) । लगभग तीन वर्ष पूर्व वर्धमान हाइट्स, दुर्ग निवासी वाघेला दम्पति ने अपने देहदान एवं नेत्रदान की वसीयत नवदृष्टि फाउंडेशन को सौंपी थी आज हेमराज भाई वाघेला के निधन के पश्चात वाघेला परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हेमराज भाई वाघेला के निधन के बाद उनके परिवार ने गहरे दुःख के बीच ऐसा प्रेरणादायी निर्णय लिया, जिसने मानवता के प्रति समाज में नई उम्मीद जगाई। परिवार ने मध्यरात्रि 2 बजे नेत्रदान का संकल्प लेकर दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नेत्र ज्योति देने का पुनीत कार्य किया एवं सुबह देहदान का निर्णय ले उनके पार्थिव शरीर को शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज के सुपुर्द किया

हेमराज की पत्नी वनिता वाघेला पुत्र कृष्णा वाघेला,पुत्री तरुणा सोलंकी व् वधु शीतल वाघेला,महक वाघेला, सर्वेश वाघेला की सहमति से यह नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न कराने हेतु नवदृष्टि फाउंडेशन के राज आढ़तिया, कुलवंत भाटिया, मंगल अग्रवाल, रितेश जैन,मुकेश राठी ,जितेंद्र कारिया , रात में ही वाघेला निवास पहुंचे और पूरी व्यवस्था संभाली। वहीं श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की टीम में डॉ.श्रीया पंजवानी , डॉ. प्रतीक लकड़ा एवं नेत्र प्रभारी विवेक कसार ने मध्यरात्रि में पहुंचकर कॉर्निया संकलित किए।

शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजलि वंजारी के निर्देशन में संदीप रिशबुड, दीपक रवानी एवं दयाराम की टीम द्वारा देहदान की प्रक्रिया पूर्ण की गई। हेमराज भाई वाघेला के पुत्र कृष्णा वाघेला ने भावुक शब्दों में कहा कि पिता के निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है और दुःख का पहाड़ टूट पड़ा है, लेकिन यह संतोष भी है कि हमने उनकी हार्दिक इच्छा पूर्ण की अब उनके नेत्र अब दो परिवारों के जीवन में नई ज्योति बनेंगे।

एवं उनकी देह से मेडिकल के छात्रों को रिसर्च हेतु मदद मिलेगी उन्होंने कहा कि इस निर्णय से परिवार को आत्मिक शांति मिली है और उन्हें उम्मीद है कि समाज भी इससे प्रेरणा लेकर नेत्रदान जैसे महादान के लिए आगे आएगा। नवदृष्टि फाउंडेशन के राज आढ़तिया ने कहा कि वाघेला परिवार समाज का प्रतिष्ठित एवं सेवाभावी परिवार है। परिवार के मुखिया के नेत्रदान एवं देहदान का निर्णय समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण है, जो निश्चित रूप से लोगों को मानव सेवा के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय संस्था के जनजागरूकता अभियान को नई गति प्रदान करते हैं।