छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा को मिलेगी नई दिशा: IIT मद्रास के साथ ऐतिहासिक एमओयू, 10 जिलों में शुरू होगा डेटा आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन - vedantsamachar.in

छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा को मिलेगी नई दिशा: IIT मद्रास के साथ ऐतिहासिक एमओयू, 10 जिलों में शुरू होगा डेटा आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन

रायपुर, 23 जुलाई (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। परिवहन विभाग ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी (CoERS) के साथ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत राज्य में डेटा आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन कार्यक्रम लागू किया जाएगा, जिसकी शुरुआत पहले चरण में सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से सबसे संवेदनशील 10 जिलों से होगी।

रायपुर में गुरुवार को परिवहन विभाग और आईआईटी मद्रास के संयुक्त तत्वावधान में “डेटा-आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वन, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ शासन और आईआईटी मद्रास के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक विश्लेषण और डेटा आधारित रणनीति के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों में प्रभावी कमी लाना है।

कार्यशाला में अधिकारियों को बताया गया कि राज्यभर में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों का गहन विश्लेषण कर ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान की जाएगी। इन स्थानों पर कम लागत वाले इंजीनियरिंग सुधार और हाइपरलोकल सड़क सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। इसके लिए ‘संजय’ प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा, जिससे दुर्घटना संभावित स्थलों की समय रहते पहचान कर साक्ष्य आधारित निर्णय लिए जा सकेंगे।

पहले चरण में राज्य के 10 सबसे अधिक दुर्घटना प्रभावित जिलों को शामिल किया गया है। इन जिलों में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक जिले की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप डेटा आधारित सड़क सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना किसी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति होती है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि ऐसी सुरक्षित सड़क व्यवस्था विकसित करना है, जिससे हर नागरिक सुरक्षित अपने घर पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यह पहल “सुरक्षित छत्तीसगढ़” के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम साबित होगी।

परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश ने कहा कि ‘संजय’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से दुर्घटना संभावित स्थलों की वैज्ञानिक पहचान कर समयबद्ध हस्तक्षेप करना संभव होगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से समन्वित प्रयास करते हुए दुर्घटनामुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल करने का आह्वान किया।

कार्यशाला में चयनित 10 जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी), क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ), जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ), एनआईसीसी के जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक और जिला सड़क सुरक्षा समिति के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने बताया कि डेटा आधारित योजना, तकनीकी विश्लेषण और त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

राज्य सरकार का मानना है कि आईआईटी मद्रास के तकनीकी सहयोग और आधुनिक डेटा विश्लेषण प्रणाली के जरिए सड़क सुरक्षा को लेकर नीति निर्माण और क्रियान्वयन अधिक प्रभावी होगा। यह पहल न केवल दुर्घटनाओं को कम करेगी, बल्कि भविष्य में पूरे राज्य के लिए एक आधुनिक और वैज्ञानिक सड़क सुरक्षा मॉडल भी तैयार करेगी।