रायपुर में नाबालिग वाहन चालकों पर सख्ती, 3 दिन में 145 मामलों में कार्रवाई; ओवरलोड स्कूली ऑटो भी निशाने पर - vedantsamachar.in

रायपुर में नाबालिग वाहन चालकों पर सख्ती, 3 दिन में 145 मामलों में कार्रवाई; ओवरलोड स्कूली ऑटो भी निशाने पर

रायपुर, 21 जुलाई (वेदांत समाचार)। राजधानी रायपुर में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यातायात पुलिस ने नाबालिग वाहन चालकों और क्षमता से अधिक स्कूली बच्चों को बैठाकर चलने वाले ऑटो-रिक्शाओं के खिलाफ विशेष अभियान तेज कर दिया है। पुलिस कमिश्नरेट रायपुर की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत पिछले तीन दिनों में कुल 145 प्रकरणों में वैधानिक कार्रवाई की गई है। साथ ही अभिभावकों की काउंसलिंग कर उन्हें नाबालिग बच्चों को वाहन नहीं देने की सख्त हिदायत भी दी गई।

पुलिस उपायुक्त (यातायात) डॉ. अर्चना झा के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि शहर में सुरक्षित और अनुशासित यातायात संस्कृति विकसित करना है। यातायात पुलिस नई पीढ़ी में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार सुधारात्मक और जनजागरूकता अभियान चला रही है।

अभियान के दौरान शहर के विभिन्न स्कूलों के बाहर विशेष जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान केपीएस स्कूल कमल विहार, आत्मानंद स्कूल पचपेड़ी नाका, भारत माता स्कूल टाटीबंध, जे.आर. दानी स्कूल कालीबाड़ी, देशबंधु स्कूल अग्रसेन चौक, रेयान स्कूल अवंती विहार और केंद्रीय विद्यालय डब्ल्यूआरएस कॉलोनी सहित कई विद्यालयों के बाहर नाबालिग छात्रों द्वारा मोटरसाइकिल चलाकर स्कूल आने के मामलों की जांच की गई। इसके साथ ही क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर संचालित हो रहे ऑटो-रिक्शाओं पर भी कार्रवाई की गई।

यातायात पुलिस ने केवल चालानी कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ समन्वय बैठक आयोजित कर स्कूल परिसर में नाबालिग विद्यार्थियों के वाहन लेकर आने पर रोक लगाने, अभिभावकों को नियमित रूप से जागरूक करने और सुरक्षित स्कूल परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

जिन नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई, उनके अभिभावकों को यातायात मुख्यालय कालीबाड़ी बुलाकर काउंसलिंग की गई। पुलिस अधिकारियों ने सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े वीडियो और प्रेजेंटेशन के माध्यम से समझाया कि कम उम्र में वाहन चलाना बच्चों के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है। साथ ही यह भी बताया गया कि नाबालिग को मोटर वाहन उपलब्ध कराना मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है और इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

काउंसलिंग के दौरान अभिभावकों को समझाया गया कि कुछ मिनटों की सुविधा के लिए बच्चों को मोटरसाइकिल देना भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। कम उम्र में वाहन मिलने से बच्चे तेज गति से वाहन चलाने, स्टंट करने, अनावश्यक रूप से घूमने और यातायात नियमों की अनदेखी जैसी प्रवृत्तियों की ओर आकर्षित हो सकते हैं, जिससे किसी भी परिवार की खुशियां पलभर में उजड़ सकती हैं।

यातायात पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए स्कूल बस, अधिकृत और क्षमता के अनुरूप ऑटो-रिक्शा अथवा अन्य सुरक्षित परिवहन साधनों का उपयोग करें तथा किसी भी परिस्थिति में नाबालिग बच्चों को मोटर वाहन उपलब्ध न कराएं।

पुलिस के अनुसार इस विशेष अभियान का उद्देश्य नाबालिग बच्चों में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, अभिभावकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना, विद्यालय-पुलिस और अभिभावकों के संयुक्त प्रयास से सुरक्षित यातायात संस्कृति विकसित करना, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना तथा बच्चों में बचपन से ही अनुशासन और जिम्मेदार नागरिक बनने के संस्कार विकसित करना है।

पुलिस उपायुक्त (यातायात) डॉ. अर्चना झा ने कहा कि यातायात व्यवस्था में स्थायी सुधार केवल चालान से संभव नहीं है। इसके लिए समाज, विद्यालय, अभिभावकों और बच्चों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और अनुशासित यातायात संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।