भोपाल , 19 जुलाई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। रिटायर्ड न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई समिति द्वारा तैयार ड्राफ्ट को स्वीकृति देते हुए सरकार ने इसे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना के अनुरूप सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करने का प्रयास है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस पहल का समर्थन करने की अपील भी की।
UCC के प्रमुख प्रावधान
बहुविवाह पर पूरी तरह रोक, एक समय में केवल एक ही वैध विवाह मान्य होगा।
हर विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
मौखिक तलाक और पंचायत के फैसलों से तलाक अमान्य होंगे।
निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को बढ़ावा देना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
बेटे-बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेंगे।
‘अवैध संतान’ शब्द समाप्त, सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार।
लिव-इन रिलेशनशिप का एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
नियमों के उल्लंघन पर 3 से 6 महीने तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
अनुसूचित जनजातियों को रखा गया बाहर
सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत संरक्षित अनुसूचित जनजातियों और पारंपरिक समुदायों पर यह कानून लागू नहीं होगा। साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पद्धतियों और रीति-रिवाजों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
जनता से मिले 9.58 लाख से अधिक सुझाव
सरकार के अनुसार, यूसीसी पर सुझाव लेने के लिए बनाए गए पोर्टल पर 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जबकि विभिन्न बैठकों के माध्यम से भी 1,100 से अधिक सुझाव मिले। सरकार का दावा है कि 93.54 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी का समर्थन किया।
कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले
बैठक में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक-2026, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026, चिकित्सा शिक्षा में दो स्वास्थ्य विश्वविद्यालयों की स्थापना, राजमार्ग कानून में संशोधन, श्रम कानूनों में सुधार और पुराने अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

