नई दिल्ली, 19 जुलाई (वेदांत समाचार) । संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से होने जा रही है। सत्र के पहले ही दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 पेश करेंगे। इस प्रस्तावित विधेयक के जरिए राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को भी वही कानूनी संरक्षण देने की तैयारी है, जो अभी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है।
वंदे मातरम् के अपमान पर होगी सजा
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालता है या उसके गायन के दौरान सभा में अशांति फैलाता है, तो उसे तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य राष्ट्रगीत के सम्मान को कानूनी संरक्षण देना है।
सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों में अनिवार्य गायन का प्रस्ताव
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान सम्मान दिया जाए। साथ ही सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रगीत के अनिवार्य गायन का भी प्रावधान शामिल किया गया है।
1971 के कानून में होगा संशोधन
सरकार राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव लेकर आई है। वर्तमान कानून में केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने पर दंड का प्रावधान है। नए संशोधन के बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को भी इसी कानूनी दायरे में शामिल किया जाएगा।
संविधान सभा के फैसले का दिया गया हवाला
विधेयक के साथ जारी Statement of Objects and Reasons में कहा गया है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया था कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि इसे ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और दर्जा प्राप्त होगा। हालांकि वर्तमान कानून में राष्ट्रगीत के अपमान को लेकर अलग से कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए यह संशोधन प्रस्तावित किया गया है।
संसद से मंजूरी के बाद बनेगा कानून
फिलहाल यह केवल एक विधेयक है। इसे कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदनों से पारित होना होगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर ही यह संशोधन प्रभावी होगा और नए प्रावधान लागू किए जाएंगे।

