रायपुर, 15 जुलाई (वेदांत समाचार)। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पूर्व महानिदेशक श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ का 14 दिवसीय विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहर, जनजातीय संस्कृति, आध्यात्मिक स्थलों और साहसिक पर्यटन स्थलों का करीब से अवलोकन किया। यात्रा पूरी होने के बाद उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भारत के सबसे समृद्ध, मौलिक और पर्यटन संभावनाओं से भरपूर राज्यों में से एक है और यह हर पर्यटक की यात्रा सूची में शामिल होना चाहिए।
श्रीमती शर्मा ने कहा कि वर्षों तक भारत के पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने के बावजूद उन्हें पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ आने का अवसर मिला। यह यात्रा उनके लिए बेहद सुखद और अविस्मरणीय रही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने उन्हें सकारात्मक रूप से आश्चर्यचकित किया। यहां की प्राकृतिक संपदा, घने जंगल, विशाल जलप्रपात, प्राचीन मंदिर, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय लोगों का आत्मीय व्यवहार इसे देश के सबसे विशिष्ट पर्यटन राज्यों में स्थान दिलाता है।
उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत राजधानी रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन और जनजातीय संग्रहालय से की। यहां उन्होंने प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा। इसके बाद वे कबीरधाम जिले पहुंचीं, जहां उन्होंने भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल, छेरकी महल तथा आसपास के वन क्षेत्रों का भ्रमण किया। उन्होंने भोरमदेव मंदिर परिसर को भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण बताया।
यात्रा के अगले चरण में उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे अमरकंटक का भ्रमण किया। यहां उन्होंने मां नर्मदा उद्गम स्थल, सायंकालीन आरती, कलचुरीकालीन मंदिर समूह, दूधधारा और कपिलधारा जलप्रपात, राजमेरगढ़, कबीर चबूतरा तथा जैन मंदिर का दर्शन किया। उन्होंने इस पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का अद्वितीय संगम बताया। वापसी के दौरान उन्होंने रतनपुर स्थित मां महामाया शक्तिपीठ में दर्शन कर प्रदेश की धार्मिक परंपराओं की भी सराहना की।
बस्तर प्रवास के दौरान श्रीमती शर्मा ने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, टाटामारी घाटी, कोंडागांव शिल्प ग्राम, नारायणपाल मंदिर, मेंदरी घुमर और तामड़ा घुमर जलप्रपात का भ्रमण किया। उन्होंने चित्रकोट जलप्रपात में नौकायन का आनंद भी लिया और कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता तथा जनजातीय कला विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने की पूरी क्षमता रखती है।
उन्होंने दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन मंदिरों के नगर बारसूर, जगदलपुर पुरातत्व संग्रहालय, बस्तर राजमहल और स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा कला, बेलमेटल शिल्प, बांस और लकड़ी की कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि यहां का हस्तशिल्प अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बना सकता है।
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में उन्होंने तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, धुड़मारास, बांस राफ्टिंग और केचला क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और एडवेंचर टूरिज्म पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए यह क्षेत्र किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ से लगे ओडिशा के जैपुर, कोलाब बांध, जगन्नाथ मंदिर, कोरापुट कॉफी प्लांटेशन, देओमाली पर्वत, दुदमा जलप्रपात, बोंडा जनजातीय बाजार और कोटपाड़ बुनकर ग्राम का भी भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से बस्तर और कोरापुट क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिला।
अपने अनुभव साझा करते हुए श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि पर्यटन केवल किसी स्थान को देखने का माध्यम नहीं है, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है। इस दृष्टि से छत्तीसगढ़ बेहद समृद्ध राज्य है। यहां आने वाला पर्यटक भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून, आध्यात्मिक शांति और जनजातीय जीवन की मौलिकता का वास्तविक अनुभव प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यदि यहां के कम चर्चित लेकिन अत्यंत आकर्षक पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह राज्य देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में शामिल हो सकता है। उन्होंने प्रदेश में विकसित हो रही पर्यटन अधोसंरचना, स्थानीय समुदाय की सहभागिता और पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की भी सराहना की।
पूर्व पर्यटन महानिदेशक ने देश और विदेश के पर्यटकों से छत्तीसगढ़ आने का आग्रह करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति एक बार इस राज्य की यात्रा करेगा, वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन धरोहरों, जनजातीय जीवन, आत्मीय आतिथ्य और अविस्मरणीय अनुभवों की यादें हमेशा अपने साथ लेकर जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मौलिक पहचान, समृद्ध पर्यटन संसाधनों और सतत पर्यटन विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों के दम पर आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ भारत के सबसे आकर्षक पर्यटन राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

