​भारत तिवारी एनकाउंटर: गवाही के लिए आयोग पहुंची गवाहों की लिस्ट, सुरक्षा घेरे में न्यायिक जांच - vedantsamachar.in

​भारत तिवारी एनकाउंटर: गवाही के लिए आयोग पहुंची गवाहों की लिस्ट, सुरक्षा घेरे में न्यायिक जांच

आरा। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को घटित भारत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इस घटना की निष्पक्ष जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग के समक्ष गवाही की प्रक्रिया जारी है। मंगलवार और बुधवार का दिन इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन दो दिनों में कुल सात गवाह आयोग के सामने अपना पक्ष रखेंगे।

​गवाहों की सूची और प्रक्रिया
​आयोग के समक्ष अब तक पांच गवाह अपनी गवाही दर्ज करा चुके हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को मृतक के छोटे भाई चंदन तिवारी, ग्रामीण राजाराम चौधरी और ललिता देवी के बयान दर्ज किए जाएंगे। वहीं, बुधवार को सरोज त्रिपाठी, अंजनी तिवारी, उषा देवी और चंद्रावती देवी आयोग के समक्ष उपस्थित होकर घटना से जुड़ी जानकारी साझा करेंगे।

​गवाहों के सनसनीखेज दावे
​सोमवार को गवाही देने वाले सत्यनारायण चौधरी ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि घटना के वक्त घटनास्थल पर करीब 30 से 35 पुलिसकर्मी मौजूद थे। सत्यनारायण के अनुसार, पुलिस ने भारत भूषण तिवारी को उनकी मांगें मानने का आश्वासन देकर हथियार डालने के लिए कहा था। आरोप है कि जैसे ही भारत ने हथियार फेंके उन्हें वहां से 50 मीटर दूर ले जाकर गोली मार दी गई। उन्होंने बताया कि आयोग के अध्यक्ष ने उनसे करीब आधे घंटे तक विस्तृत पूछताछ की।

​सुरक्षा के कड़े इंतजाम
​न्यायिक जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए डीपीआरसी (DPRC) भवन स्थित आयोग कार्यालय में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। आयोग के अध्यक्ष एवं पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की निगरानी में यह प्रक्रिया चल रही है।
​कार्यालय में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है और केवल अधिकृत लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति है। सुरक्षा की दृष्टि से हैंड मेटल डिटेक्टर और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर के जरिए जांच की जा रही है। साथ ही प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। आयोग की सुरक्षा में दो दर्जन से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया गया है।

​अब तक की जांच का घटनाक्रम
​गौरतलब है कि जांच की शुरुआत 11 जुलाई को मृतक की मां आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी के बयानों से हुई थी। उसके बाद शनिवार को भी उनसे करीब एक-एक घंटे तक पूछताछ की गई। सोमवार को सुमन देवी, मंटू चौधरी और सत्यनारायण चौधरी ने अपने बयान दर्ज कराए थे। आयोग इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके।