कोरबा,09 जुलाई (वेदांत समाचार)। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खेती के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने सहकारी समितियों में खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किसानों को समय पर कृषि आदान सामग्री उपलब्ध कराने के लिए नियमित आपूर्ति, पर्याप्त भंडारण और पारदर्शी वितरण व्यवस्था लागू की गई है। इसका लाभ अब किसानों को सीधे तौर पर मिल रहा है।
जिले की सभी सहकारी समितियों में यूरिया, एनपीके सहित आवश्यक उर्वरकों और बीज का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत बिना किसी अनावश्यक देरी के आवश्यक कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे खरीफ फसल की बुवाई समय पर हो रही है।
इसी क्रम में कोरबा जिले के ग्राम करमंदी निवासी किसान हेमचरण यादव ने भी सहकारी समिति की व्यवस्था की सराहना की। लगभग डेढ़ एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती करने वाले श्री यादव ने बताया कि उन्होंने भैंसमा सहकारी समिति से खरीफ सीजन के लिए आवश्यक उर्वरक प्राप्त किए। समिति पहुंचने पर उन्हें बिना किसी परेशानी के निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक खाद उपलब्ध करा दी गई।
हेमचरण यादव ने बताया कि उन्हें समिति से यूरिया और एनपीके उर्वरक आसानी से मिल गए। उन्होंने कहा कि सहकारी समिति में खाद और बीज दोनों पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, जिससे किसानों को कृषि सामग्री के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ रहा है। समय पर खाद मिलने से खेतों की तैयारी और बुवाई का कार्य भी तय समय पर पूरा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई व्यवस्था से खेती पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुविधाजनक हुई है। समय पर खाद और बीज उपलब्ध होने से किसानों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे पूरे उत्साह के साथ खरीफ फसल की बुवाई में जुटे हुए हैं।
किसान हेमचरण यादव ने सहकारी समिति में उपलब्ध व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि कृषि आदान सामग्री के सुचारु वितरण से किसानों को काफी राहत मिली है। उन्होंने किसान हित में किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों से खेती को नई गति मिली है।
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को खेती के प्रत्येक चरण में आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध हों, ताकि उत्पादन में वृद्धि के साथ किसानों की आय भी बढ़ सके। इसी दिशा में सहकारी समितियों के माध्यम से खाद-बीज वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

