नागपुर। देश में स्वच्छ ऊर्जा और सतत खनन को बढ़ावा देने की दिशा में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। कंपनी ने 7 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के पेंच एरिया स्थित शिवपुरी ओपन कास्ट खदान में पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर (Pumped Storage Hydropower) परियोजना के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह परियोजना बंद हो चुकी कोयला खदानों को हरित ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक अभिनव प्रयास मानी जा रही है।
समझौते पर डब्ल्यूसीएल के पेंच एरिया के एजीएम विकास कुमार अग्रवाल और MACLEC के प्रबंध निदेशक बलराम भारद्वाज ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डब्ल्यूसीएल के निदेशक (तकनीकी) (योजना एवं परियोजना) एस. एस. परांजपे भी उपस्थित रहे।
प्रस्तावित परियोजना के तहत परित्यक्त कोयला खदान में बने जलाशय (माइन सम्प) को निचले जलाशय के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि खदान से निकले मलबे (माइन डंप) को ऊपरी जलाशय का स्वरूप दिया जाएगा। इन दोनों जलाशयों के माध्यम से पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जो बिजली उत्पादन के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण की सुविधा भी प्रदान करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक उस समय अतिरिक्त बिजली का उपयोग कर पानी को ऊपरी जलाशय तक पहुंचाती है और बिजली की मांग बढ़ने पर उसी पानी को नीचे छोड़कर बिजली का उत्पादन किया जाता है। इससे ग्रिड की स्थिरता मजबूत होती है और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है।
डब्ल्यूसीएल का कहना है कि यह परियोजना बंद हो चुकी कोयला खदानों को स्वच्छ ऊर्जा परिसंपत्तियों में बदलने की दिशा में एक नया मॉडल साबित होगी। इससे खदानों के उपयोग का नया विकल्प मिलेगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और हरित ऊर्जा उत्पादन में भी उल्लेखनीय योगदान होगा।
कंपनी का मानना है कि यह पहल ‘ग्रीन माइन क्लोजर’ की अवधारणा को मजबूत करेगी तथा नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और टिकाऊ खनन के क्षेत्र में देशभर के कोयला उद्योग के लिए नई दिशा तय करेगी। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में देश की अन्य बंद कोयला खदानों में भी इसी मॉडल को अपनाया जा सकता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा। डब्ल्यूसीएल की यह पहल भारत के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।

