रायगढ़ की 27 वर्षीय युवती को वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन से मिली दो लाख रुपये की सहायता, आधुनिक कृत्रिम पैर लगने के बाद लौटी आत्मनिर्भरता
रायपुर/रायगढ़, 7 जुलाई 2026 (वेदांत समाचार)। संवेदनशील प्रशासन और समय पर मिली सरकारी सहायता ने रायगढ़ जिले की रहने वाली 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन को नई दिशा दी है। एक सड़क दुर्घटना के बाद अपना बायां पैर गंवाने वाली बबीता अब आधुनिक कृत्रिम पैर की मदद से फिर से सामान्य जीवन जी रही हैं। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका आधुनिक कृत्रिम पैर लग सका।
रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव वर्ष 2025 में एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गई थीं। दुर्घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण फैल गया, जो धीरे-धीरे हड्डियों तक पहुंच गया। चिकित्सकों ने संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटने का निर्णय लिया। इस घटना के बाद बबीता के सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियों का कठिन दौर शुरू हो गया और उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया।
हालांकि, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बबीता ने हार नहीं मानी। उन्होंने कृत्रिम पैर लगवाने के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और रायगढ़ कलेक्टर से सहायता की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए।
जिला प्रशासन के समन्वय से रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान में बबीता यादव का आधुनिक कृत्रिम पैर लगाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अब वह सहज रूप से चल-फिर पा रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं और आत्मविश्वास के साथ पहले की तरह सामान्य एवं आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर रही हैं।
बबीता यादव ने कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपर कलेक्टर से मुलाकात कर भी धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता ने उन्हें नया जीवन, नया आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति नई उम्मीद दी है।
जिला प्रशासन का यह प्रयास न केवल एक दिव्यांग युवती को आत्मनिर्भर बनाने का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समय पर की गई संवेदनशील पहल किसी व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। प्रशासन की इस मानवीय पहल की क्षेत्र में सराहना की जा रही है।

