वीबी-जीरामजी योजना से दिव्यांगों की बदली जिंदगी: 125 दिन का रोजगार, 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी और मेट की जिम्मेदारी से बढ़ा आत्मविश्वास - vedantsamachar.in

वीबी-जीरामजी योजना से दिव्यांगों की बदली जिंदगी: 125 दिन का रोजगार, 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी और मेट की जिम्मेदारी से बढ़ा आत्मविश्वास

रायपुर, 4 जुलाई 2026 (वेदांत समाचार)। छत्तीसगढ़ सरकार की विकसित भारत-जीरामजी (ग्रामीण रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन) योजना दिव्यांगजनों के लिए सम्मानजनक रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। योजना के तहत दिव्यांग हितग्राहियों को अब पहले की तुलना में अधिक कार्य दिवस, बेहतर मजदूरी और जिम्मेदारीपूर्ण कार्य सौंपे जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि समाज में उनका आत्मविश्वास और सम्मान भी बढ़ा है।

पहले मनरेगा के अंतर्गत दिव्यांग हितग्राहियों को 100 दिनों का रोजगार और निर्धारित मजदूरी मिलती थी, लेकिन अब वीबी-जीरामजी योजना के तहत उन्हें 125 दिनों का रोजगार और प्रतिदिन 300 रुपये की मजदूरी दी जा रही है। इसके साथ ही योग्य हितग्राहियों को मेट जैसी जिम्मेदारी भी सौंपी जा रही है, जिससे वे नेतृत्व की भूमिका निभाते हुए अन्य मजदूरों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सुंदरा निवासी दिव्यांग हितग्राही चंद्रप्रकाश साहू इस योजना का लाभ उठाने वाले प्रमुख लोगों में शामिल हैं। उन्हें 100 मजदूरों के कार्य की निगरानी के लिए मेट की जिम्मेदारी दी गई है। चंद्रप्रकाश बताते हैं कि पहले मनरेगा के तहत सीमित रोजगार मिलता था, लेकिन अब 125 दिनों तक काम मिलने और 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत हुई है। उनका कहना है कि मेट की जिम्मेदारी मिलने से समाज में उन्हें नई पहचान और सम्मान मिला है, जिससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

चंद्रप्रकाश साहू के उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए राजनांदगांव प्रवास के दौरान जिले के प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव ने उन्हें शॉल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। चंद्रप्रकाश ने इसे अपने जीवन का यादगार क्षण बताते हुए कहा कि इस सम्मान ने उन्हें और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा दी है।

इसी तरह राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम कोहका की दिव्यांग हितग्राही रंभा मंडावी भी वीबी-जीरामजी योजना के माध्यम से आत्मनिर्भर बनी हैं। पहले उन्हें मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार और 261 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलती थी, जबकि अब उन्हें 125 दिनों का रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और परिवार को आर्थिक मजबूती मिली है।

रंभा मंडावी केवल मेट के रूप में कार्य ही नहीं कर रही हैं, बल्कि गांव के लोगों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दे रही हैं। उनके प्रयासों से पात्र हितग्राहियों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें भी प्रभारी मंत्री गजेन्द्र यादव ने शॉल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। रंभा का कहना है कि इस सम्मान ने उनके उत्साह और आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी है।

दोनों हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वीबी-जीरामजी योजना दिव्यांगजनों के लिए सम्मानजनक रोजगार का नया अवसर लेकर आई है। बढ़े हुए कार्य दिवस, बेहतर मजदूरी और जिम्मेदारीपूर्ण दायित्वों ने उनके जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और नई उम्मीद का संचार किया है।

राज्य सरकार का मानना है कि वीबी-जीरामजी योजना के माध्यम से दिव्यांगजनों को केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि नेतृत्व, सम्मान और आत्मनिर्भरता का अवसर भी मिल रहा है। यही कारण है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांग हितग्राहियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।